छोटी बहन की हत्या के मामले में आरोपी बहन और उसके प्रेमी को राहत देने से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। नरसिंहपुर के बहुचर्चित शिखा हत्याकांड में जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्यारी बहन खुशबू और उसके प्रेमी राहुल को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने सगे भाई-बहनों व युवाओं में ईर्ष्या के चलते मानसिक विकृति बढऩे के मामलों में गंभीर चिंता जताई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि भाई-बहनों की ईर्ष्या मानसिक विकृति को जन्म देती है जो उन्हें अपराध के रास्ते पर धकेलती है। समाज में अनियंत्रित रूप लेने से पहले ठीक करने समुचित उपाय जरूरी हैं। राज्य के प्राधिकारी प्रदेश के प्रत्येक स्कूल व कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति करें। कम से कम जिला स्तरीय अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। युगलपीठ ने इस संबंध में 90 दिन में एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
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उम्रकैद के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट
बता दें कि नरसिंहपुर जिले में साईं खेड़ा निवासी खुशबू उर्फ दिशा अवस्थी पर आरोप है कि उसने अपने साथी राहुल सिंह के साथ मिलकर अपनी छोटी बहन शिखा अवस्थी की हत्या कर दी थी। खुशबू अवस्थी ने यह स्वीकार किया कि वह अपनी बहन शिखा को अधिक महत्व दिए जाने के कारण हीन भावना से ग्रस्त थी। इसी शत्रुता और ईर्ष्या के कारण उसने छोटी बहन की हत्या कर दी। जिला न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। इसके खिलाफ आरोपियों द्वारा हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत कर सजा निरस्त करने और जमानत देने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया गया। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान जमानत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद जमानत आवेदन वापस लेने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किए।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी करते हुए उसकी एक प्रति राज्य के चीफ सेक्रेटरी को भेजने के आदेश जारी किए हैं। इससे वह नागरिकों के मेंटल हेल्थ के मामलों के बारे में एक पॉलिसी बना सकें। इसमें युवाओं और बुज़ुर्गों पर खास ध्यान दिया जाए और संबंधित डिपार्टमेंट को निर्देश दिया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में और कम से कम राज्य के ज़िला अस्पतालों में अपने रिसोर्स के अंदर, काबिल लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस मेंटल हेल्थ क्लीनिक बनाने के लिए सही एक्शन ले सकें।