स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान कार्यरत अतिथि शिक्षकों से 200 दिन या तीन सेमेस्टर के कार्य अनुभव का प्रमाण-पत्र मांगे जाने के नियम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बसंल ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, कोर्ट ने वर्तमान में निर्धारित अनुभव नहीं रखने वाले अतिथि शिक्षकों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता प्रियंका सैनी, सुनीता कटारे सहित अन्य ने याचिका में तर्क दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग की भर्ती में अतिथि शिक्षकों के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी तय की थी, जिसे बढ़ाकर 20 फरवरी कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आवेदन के दौरान 200 दिन या तीन सेमेस्टर का कार्य अनुभव प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया जाना अनुचित और पक्षपातपूर्ण है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ईशान सोनी ने कोर्ट में दलील दी कि नियमानुसार चयनित होने के बाद अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन आवेदन प्रक्रिया में ही इसे अनिवार्य बनाना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कई अतिथि शिक्षक जल्द ही यह अनुभव अवधि पूरी कर लेंगे, ऐसे में उन्हें आवेदन प्रक्रिया से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।
इस याचिका में प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग को पक्षकार बनाया गया था।
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, अंतरिम आदेश में निर्देश दिया गया है कि जिन अतिथि शिक्षकों के पास वर्तमान में अनुभव प्रमाण-पत्र नहीं है, उन्हें भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक यह चयन प्रक्रिया कोर्ट के निर्णय के अधीन रहेगी।