हाईकोर्ट ने पीजी मेडिकल सीट छोड़ने वाली डॉ. निशा सिंह रावत को राहत दी है। कोर्ट ने 30 लाख रुपये बॉन्ड राशि लिए बिना दस्तावेज लौटाने के आदेश दिए। डॉक्टर ने पिता की मृत्यु के कारण सीट छोड़ी थी। एनएमसी व राज्य सरकार ने पहले ही बॉन्ड शर्त हटाई थी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने मेडिकल पीजी सीट छोड़ने वाली महिला डॉक्टर को आंशिक राहत प्रदान की है। युगलपीठ ने सीट लिविंग बॉण्ड की शर्त अनुसार 30 लाख रुपये की राशि जुर्माने के रूप में लिए बिना याचिकाकर्ता को दस्तावेज लौटाने के आदेश जारी किए हैं।
भोपाल निवासी डॉ. निशा सिंह रावत की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में उसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में माइक्रोबायोलॉजी पीजी मेडिकल सीट पर दाखिला लिया था। इसके बाद पिता की मृत्यु होने के कारण भोपाल में मां की देखभाल के कारण उसे मजबूरन कोर्स छोडना पड़ा। वह गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल में सामुदायिक चिकित्सा विभाग में एक प्रदर्शक के रूप में फिर से शामिल होना चाहती है। एनएससीबी मेडिकल कॉलेज द्वारा सीट छोड़ने के बॉण्ड टर्म के अनुसार दस्तावेज लौटाने के एवज में 30 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं।
याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने पहले ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 लाख रुपये के बॉण्ड की शर्त हटाने का निर्देश दिए थे। मध्य प्रदेश सरकार ने 15 जून, 2024 को जारी आदेश में कहा है कि पीजी सीटें छोड़ने वाले छात्रों से कोई बॉण्ड राशि नहीं ली जाएगी। याचिकाकर्ता को पिता की मौत के कारण मजबूरन सीट छोड़ना पड़ी है। पीजी सीट में बढ़ोतरी होने के कारण कई सीट रिक्त खाली हैं। सीट ब्लॉक का मामला सिर्फ काउंसलिंग के दौरान आता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।