शैक्षणिक संस्थाओं की राशि के दुरूपयोग तथा मिशन की संपत्ति का फर्जीवाड़ा करने के मामले में जेल में बंद बिशप पीसी सिंह के घोटाले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। ईओडब्ल्यू ने बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के सचिव नीरज डेविड से सोमवार को पूछताछ की। जिसमें कई खुलासे हुए।
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कोरोना काल में मिली सहायता राशि हड़पी
ईओडब्ल्यू के डीएसपी स्वर्ण सिंह धामी से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी बिशप पी सी सिंह ने जोहरा नामक ट्रस्ट बनाया था। उनके द्वारा एक और ट्रस्ट का गठन किया गया था,जो बाद में बंद कर दिया गया। उनके ट्रस्ट को विदेश से आर्थिक सहायत मिली थी। ट्रस्ट को आर्थिक सहायता कोरोना काल में लोगों की मदद तथा बच्चों की फीस के लिए मिली थी। जिसका दुरूपयोग कर पूर्व बिशप पी सी सिंह तथा ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने रुपयों की आपस में बंदरबांट कर ली।
शैक्षणिक संस्थाओं की राशि के दुरूपयोग के संबंध में ईओडब्ल्यू ने बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के सचिव नीरज डेविड से सोमवार को पूछताछ की। सचिव से पूछताछ मंगलवार को भी जारी रहेगी। ईओडब्ल्यू को पूछताछ के दौरान सचिव डेविड से आर्थिक अनियमितताओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
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2 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोपी है बिशप पीसी सिंह
बता दें, ईओडब्ल्यू की टीम ने 8 सितम्बर को बिशप पी सी सिंह के नेपियर टाउन स्थित कार्यालय तथा घर में दबिश दी थी। दबिश के दौरान 80 लाख का सोना, 1 करोड़ 65 लाख रुपये नगद, 48 बैंक खाते, 18,352 यूएस डॉलर, 118 पांउड, 9 लग्जरी गाड़ियां, 17 संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। दबिश के दौरान बिशप देश के बाहर थे। ईओडब्ल्यू ने बिशप को नागपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। बिशप का बेटा भी पुलिस हिरासत में है। उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक में साढ़े 6 करोड़ रुपये जमा थे। इसके अलावा उन्होंने मिशन कम्पाउण्ड स्थित बेश कीमती जमीन खुद के नाम आधे दामों में खरीदी थी। बिशप रहते हुए उन्होंने जमीन बेची और क्रेता के तौर पर स्वंय खरीद ली। उनके खिलाफ देशभर के अलग-अलग राज्यों में 99 मामले दर्ज हैं।