जबलपुर जिले के उखरी सब स्टेशन में हुए तोड़फोड़ मामले में विद्युत विभाग के सहायक यंत्री को हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है। हाईकोर्ट जस्टिस पीके अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता की तरफ से पेश यह तर्क कि अत्याचार अधिनियम का मामला नहीं बनता, आधारहीन नहीं है।
याचिकाकर्ता बीएस मरावी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि शिकायत कर्ता सहित भाजपा पार्षद अतुल जैन सहित अन्य ने 19 जून 2024 को सब स्टेशन में नारेबाजी करते हुए तोड़फोड़ की थी। विभाग के द्वारा उनके खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गयी थी, जिसके अगले दिन विद्युत विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर दी गयी।
याचिका में कहा गया था कि कार्यालय में तोड़फोड़ करने वालों में पुष्पेन्द्र सिंह के खिलाफ छह बिजली चोरी के प्रकरण दर्ज हैं और 17 लाख 44 हजार रुपये बकाया है। इसके अलावा बिजली बिल जमा नहीं करने के कारण काटे गए कनेक्शन को जोड़ने के दबाव बनाने भाजपा पार्षद अपने साथियों के साथ है।
मुख्य अभियंता ने भी अपनी जांच में पाया है कि सुनियोजित तरीके से कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए तोड़फोड़ की गई थी। भाजपा पार्षद व उनके समर्थकों के द्वारा कार्यालय में तोड़फोड़ करने के समाचार भी अखबारों में प्रकाशित हुआ था। इसके अलावा पूरे घटनाक्रम की फुटेज भी उपलब्ध है। एकलपीठ ने उक्त मत के साथ याचिकाकर्ता को एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में जमानत का लाभ प्रदान किया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने पैरवी की।