बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर द्वारा खुद पर लगे आरोप की स्वयं जांच कर क्लीन चिट दिए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार पूर्व विधायक किशोर समरिते की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य ने कस्टम मिलिंग व चावल के अवैध कारोबारियों, कान्हा स्थित रिसोर्ट संचालकों, रेत ठेकेदारों, कंस्ट्रक्शन कंपनी से रिश्वत के रूप में मंहगे गिफ्ट खुद व परिजनों के नाम पर लिए थे। इस संबंध में उन्होंने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने शिकायत पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया था। राज्य सरकार ने जांच बालाघाट कलेक्टर को ही सौंप दी थी। तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने खुद पर लगे आरोपों की स्वयं जांच की, और खुद को क्लीन चिट प्रदान कर दी।
तत्कालीन कलेक्टर द्वारा खुद की जांच किए जाने के खिलाफ किशोर समरिते ने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव द्वारा शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लिए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि नियमानुसार जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं, उसकी जांच वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा है कि शिकायत की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए। शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर तथा गलत पाए जाने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे पैरवी कर रहे हैं।