ओमती पुलिस द्वारा आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किए गए प्रकरण को खारिज किए जाने की मांग करते हुए अब्दुल रज्जाक ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुनीता यादव की युगलपीठ ने याचिका खारिज कर दी है। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष अपनी आपत्ति पेश कर सकता है। नया मोहल्ला निवासी अब्दुल रज्जाक ने ओमती पुलिस द्वारा आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किये गये प्रकरण को खारिज करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उसे प्रकरण में झूठा फसाया गया है। जो फायर आर्म्स बरामद हुए थे वह लायसेंसी थे। किसी प्रकार के कोई धारदार हथियार नहीं मिले थे,जो पुलिस द्वारा बताये गये थे। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा था कि प्रकरण खारिज किये जाने के मामले में न्यायालय से संयम व धैर्य से काम लेना चाहिए। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया था। एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से अपील दायर की गयी थी। सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपील याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दी।