मेसर्स शिव कंस्ट्रक्शन एंड कार्पोरेट ने बकाया बिल वसूली के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस डीके पालीपाल ने पाया कि अन्य वैकल्पिक कानूनी प्रावधान होने के बावजूद भी याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की है। बिल वसूली को रिट याचिका का पर्याप्त आधार नहीं मानते हुए युगलपीठ ने उसे खारिज कर दिया।
मेसर्स शिव कंस्ट्रक्शन एंड कार्पोरेट की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि पीएचई विभाग द्वारा उनके बिल का भुगतान नहीं किया जा रहा है। याचिका में मांग की गई थी कि ब्याज सहित बकाया बिलों के भुगतान के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनुबंध शर्तों के तहत याचिकाकर्ता के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं। इसके बावजूद भी उसके याचिका दायर की है। युगलपीठ ने अन्य कानूनी प्रावधान के उपयोग की स्वतंत्रता देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।