एमपी जजेस एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि कोरोना काल में जिला न्यायालय सहित अधीनस्थ कोर्ट में न्यायाधिशों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जनता को न्याय दिए। याचिका में मांग की गई थी कि कोरोना कार्य में अपने सेवाएं देने वाले अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स की तरह उन्हें भी मुख्यमंत्री कोविड योजना का लाभ दिया जाए। कोरोना वायरस के संक्रमण में आने के कारण प्रदेश में 14 न्यायाधीशों की मृत्यु हुई है तथा लगभग 4 सौ न्यायाधीश संक्रमित हुए हैं। याचिका में संक्रमित न्यायाधीशों को सम्पूर्ण उपचार तथा मृतक न्यायाधीशों के परिजनों को पचास लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है।
याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की तरफ से बताया गया कि कोरोना काल में जोखिम लेकर न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों ने कार्य किया है। उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों के तहत योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने अगली सुनवाई 4 अप्रैल को निर्धारित की है।