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इंटरव्यू: इंदर सिंह परमार बोले- सरकारी स्कूलों में 3 साल के बच्चों को प्रवेश मिलेगा, 53 स्कूल में AI की पढ़ाई अगले सत्र से  

सार

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी 3 साल के बच्चों को प्रवेश मिलेगा। अगले सत्र से 53 स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में संस्कृत की पढ़ाई शुरू की जाएगी। यह बात स्कूल शिक्षा और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने इंटरव्यू में कही। परमार ने ओबीसी वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर बैठे उम्मीदवारों की मांग पर भी जवाब दिया। 
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मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की नई शिक्षा नीति समेत कई मुद्दों पर अपनी राय जाहिर की। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश-
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प्रदेश में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की स्थिति क्या है?
इंदर सिंह परमार- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के स्टेप बाय स्टेप काम हैं। जिस पर भारत सरकार के निर्देशानुसार काम चल रहा है। हम उनके अनुसार ही सारी व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। अगले साल से मूल्यांकन पद्धति में समग्र मूल्यांकन आधार होगा। जुलाई में इसकी पूरी स्थिति साफ हो जाएगी। ताकि बच्चे पढ़ाई शुरू करने से पहले किस लाइन पर जाना है समझ सकें। इसमें पूरे वर्ष की गतिविधियों को वेटेज दिया जाएगा। सिर्फ वार्षिक परीक्षा ही आधार नहीं होगी।
 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रदेश में कोई बदलाव किया जा रहा है?
इंदर सिंह परमार- अब तीन साल के बच्चे को भी सरकारी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। यह पूरे राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव हो रहा है। हम सीएम राइज स्कूल में बच्चों को प्रवेश देंगे। बाकी कुछ जगह आंगनवाड़ी में रखेंगे।
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एमपी बोर्ड की कक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कितने स्कूलों में शुरू की जाएगी?
इंटर सिंह परमार- आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस की पढ़ाई अगले सत्र से 8वीं से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई जाएगी। इसे अभी प्रदेश के 53 स्कूलों में शामिल किया जाएगा। 52 जिला केंद्र और एक मेरे विधानसभा क्षेत्र के स्कूल में। इसमें एक कक्षा में 40 बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। 240 घंटे के रूप में एक पूरे विषय को पढ़ाने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य होगा। अभी कुछ घंटे के लिए पढ़ाई कराई जाती है। हम एक विषय के रूप में पूरे साल पढ़ाएंगे।
 
संस्कृत की पढ़ाई स्कूलों में शुरू करने पर काम किया जा रहा है?
इंदर सिंह परमार- प्रदेश में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में संस्कृत से पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। संस्कृत की वैज्ञानिक भाषा के रूप में पहचान आ गई है। कम्प्यूटर की लैंग्वेज बनाने का काम चल रहा है। इसका अगले सत्र से प्रारंभिक ज्ञान देना शुरू किया जाएगा।

सीएम राइज, ओपन, मॉडल समेत अलग-अलग स्कूल बनाए जा रहे हैं। गुणवत्ता एक जैसी रखने क्या किया जा रहा है?  
इंदर सिंह परमार- देखिए, सीएम राइज स्कूल का सिस्टम और सेटअप एक अलग प्रकार का है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जो पाठ्यक्रम तय हो रहे हैं, वे सब एक जैसे हो रहे हैं लेकिन सभी में विकल्प भी हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट है कि बच्चों को आजादी रहेगी कि कौन सा विषय लेना है। बीच सत्र में भी बच्चा दूसरा विषय ले सकता है। हम 53 ओपन स्कूलों में ही संस्कृत और एआई की पढ़ाई जैसे नए प्रयोग कर रहे हैं।

सीएम राइज स्कूलों की क्या तैयारी है?
इंदर सिंह परमार- सीएम राइज स्कूल में देश में अलग काम होगा। दो साल में 4 से 5 हजार छात्रों के कैंपस वाले भवन होंगे। जिनमें लैब, लाइब्रेरी, खेल मैदान से लेकर सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके भवन निजी और सेंट्रल स्कूल से भी अच्छे होंगे। बेहतर सुविधाएं और प्राकृतिक वातावरण के साथ होंगे।  

केंद्र से अनुदान मिलने के बावजूद पहली से आठवीं तक स्कूलों की प्रदेश में स्थिति सुधरती नहीं दिख रही?
इंदर सिंह परमार- हम लगातार स्कूलों की समीक्षा कर रहे हैं। और बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों की उपस्थिति, रिजल्ट और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर काम किया जा रहा है।

शिक्षक के पदों को लंबे समय बाद भी नहीं भरने के आरोप लग रहे हैं?
इंदर सिंह परमार- पात्रता परीक्षा के बाद स्कूल शिक्षा विभाग दस्तावेजों और अन्य जरूरी पात्रता का सत्यापन करता है। इसके बाद सूची जारी की जाती है। प्रक्रिया अनुसार कार्रवाई की जाती है।
 
ओबीसी आरक्षण को लेकर उम्मीदवार धरने पर बैठे हैं?  
इंदर सिंह परमार- प्रदेश सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर भर्ती कर दी, लेकिन तीन-चार विषयों में कोर्ट का स्टे है। उसको हमने 14 प्रतिशत आरक्षण दिया है। 13 प्रतिशत आरक्षण होल्ड पर है। धरने पर बैठे उम्मीदवारों को समझ ही नहीं है कि कोर्ट में केस का अंतिम निर्णय आने तक कुछ नहीं किया जा सकता। आज की तारीख में कोई त्रुटि है तो उसको सुधारने का काम चल रहा है। बाकी हमने वेटिंग लिस्ट सभी विषयों की जारी कर दी है। डबल डिग्री जैसे कुछ कंट्रोवर्सी विषय थे, उनका निराकरण करके नियुक्तियां भी दे दी हैं।

10वीं और 12वीं के परीक्षा के जारी परिणामों पर विद्यार्थियों से क्या कहेंगे?
इंदर सिंह परमार- कोरोना की परिस्थिति के हिसाब से रिजल्ट ठीक है, परंतु अपेक्षा और अच्छे की थी। सामान्य परिस्थितियां रहतीं तो रिजल्ट और अच्छा रहता। अच्छे परिणाम वाले बच्चों को बधाई और शुभकामनाएं। जिनका रिजल्ट कमजोर रहा है वे रुक जाना नहीं योजना में एप्लाई करें और अपना रिजल्ट सुधारें।
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