ममता ने कमरू से कोर्ट मैरिज की थी।
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उत्तरप्रदेश की एसडीएम ज्योति मौर्य का अपने पति से जारी विवाद सुुर्खियों में है। इस तरह का मामला मध्य प्रदेश के देवास मेें भी सामने आया है। जिसमें एक पत्नी ने अपने पति को पढ़ाने के लिए बर्तन मांज कर पैसे जुटाए। परीक्षा पास कर पति कर्मशियल टैक्स अफसर बना तो उसने पत्नी से नाता तोड़ दिया और दूसरा घर बसा लिया।
ये कहानी है देवास के बागली क्षेत्र में रहने वाली आदिवासी महिला ममता की। वह अलीराजपुर जिले के कोठड़ी गांव मेें रहने वाले कमरू से प्यार करती थी। दोनों ने आठ साल पहले कोर्ट मैरिज कर ली थी। तब कमरु के पास नौकरी नहीं थी, लेकिन वह स्नातक था और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। ममता ने उसे पढ़ाई में मदद करने के लिए दूसरे के घर बर्तन मांजे, दुकानों पर भी काम किया। वह अपने पति के लिए नोट्स भी मंगाती थी, ताकि पति की परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह से हो सके।
नौकरी मिलते ही नई महिला को अपनाया
2019-20 में कमरू को सफलता मिली। कमरू का कमर्शियल टैक्स अफसर के पद पर चयन हो गया। उसकी पहली पोस्टिंग रतलाम में हुई। इस बीच उसका परिचय जोबट की एक युवती से हो गया। दोनों के बीच दोस्ती गहराई तो कमरू ने ममता को मायके भेज दिया। कुछ दिनों बाद वह युवती के साथ रहने लगा और दूसरी शादी कर ली। ममता को उसने साथ नहीं रखा। इसके बाद ममता ने अपने पति के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर कर दिया। कोर्ट में भी कमरू स्वीकार कर चुका है कि ममता उसकी पत्नी है, लेकिन उसे वह गुजारा भत्ता नहीं देता है।
ममता की दूसरी शादी
कमरू ममता का दूसरा पति है। उसकी पहली शादी 16 साल पहले हुई थी, लेकिन शादी के ढाई साल बाद ही पति की मौत हो गई। पहले पति से हुए बेटे की भी मौत हो चुकी है। इसके बाद कमरू उसके संपर्क में आया था और दोनों ने शादी कर ली। ममता अपने पति के साथ रहना चाहती है, लेकिन अफसर बनने के बाद पति कमरू साथ नहीं रहना चाहता।