गुजरात में मिली बम्पर सफलता से भाजपा उत्साहित है। खासकर मध्यप्रदेश भाजपा के वह नेता जिन्हें गुजरात भेजा गया था। मालवा-निमाड़ के 90 नेताओं को गुजरात में 37 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। यह नेता गुजरात में दो महीने डेरा डाले रहे। कार्यकर्ताओं से लेकर मतदाताओं के बीच घुल-मिल गए थे। गुजरात भाजपा ने भी इन नेताओं के फीडबैक को महत्व दिया और उसके हिसाब से इन 37 सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार की गई। इसका परिणाम यह रहा कि 37 में से 34 सीटें भाजपा की झोली में आ गई।
गुजरात के हर विधानसभा चुनाव में प्रदेश के नेताओं की मदद ली जाती है। खासकर उन इलाकों में जो मध्यप्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं। खासकर मध्यप्रदेश के झाबुुआ, आलीराजपुर क्षेत्र के कई आदिवासी परिवारों का गुजरात से करीब का नाता है। गुजरात के पांच जिलों में अक्सर प्रदेश के आदिवासी युवा काम की तलाश में जाते हैं।
नए उम्मीदवारों को दिया मौका
पांच जिलों के प्रभारी रहे पूर्व विधायक जीतू जिराती ने कहा कि हमने दावेदारों को लेकर फीडबैक दिया था। गुजरात भाजपा ने इस बार नए चेहरों को मौका दिया। इस वजह से बेहतर परिणाम आए हैं। कांग्रेेस को आणंद और महीसागर की एक-एक सीट मिली है, क्योकि यहां उम्मीदवारों का गलत चयन हुआ था। इसके अलावा एक सीट पर भाजपा के बागी उम्मीदवार ने जीत दर्ज कराई। जो तीन सीटें भाजपा हारी हैं, उनमें हार का अंतर काफी कम रहा। जो 34 सीटें हम जीते है, उनमें जीत का अंतर 20 से 30 हजार के करीब रहा। आणंद, दाहोद व बड़ौदा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा से भी चुनाव जीतने में मदद मिली।
20 सालों से निभा रहे हैं जिम्मेदारी