मंदिर के करीब से अतिक्रमण हटाए गए।
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इंदौर में मां अन्नपूर्णा मंदिर पर्यटकों की पहली पसंंद रहा है। अब नए सिरे से मंदिर आकार ले रहा है। यह मंदिर देश के छह राज्यों की संस्कृति का संगम है। खास बात यह है कि इसके निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं किया गया है। राजस्थान के मकराना से मंगवाए गए 40 हजार घनफीट मार्बल से का उपयोग मंदिर में किया जा रहा है। मंदिर का 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो गया था। जिसे नगर निगम के अमले ने हटा दिया। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने यहां दौरा कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
मेयर से मंदिर के प्रबंधक और पूजारियों ने चर्चा की थी और कहा था कि काफी लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते है, लेकिन उनके वाहन को पार्क करने के लिए जगह नहीं रहती है। मंदिर के आसपास काफी अतिक्रमण हो गया है। शनिवार को नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी दस्ता अन्नपूर्णा मंदिर रोड पर पहुंचा और दुकानदारों को सामान हटाने के लिए कहा। कई दुकानों के शेड बाहर तक लगे थे। उन्हें जेसीबी की मदद से तोड़ दिया गया। मंदिर के आसपास से करीब 40 अतिक्रमण हटाए गए। इसके अलावा रणजीत हनुमान मंदिर के आसपास से भी गुमटी, ठेले हटाने के लिए नगर निगम का अमला पहुंचा। अतिक्रमण न हटे, इसके लिए कुछ लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया, लेकिन अफसरों ने उनकी नहीं मानी। कुछ ही देर में सड़क चौड़ी नजर आने लगी।
जानिए अन्नपूर्णा मंदिर के बारे में
अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना स्वामी प्रभानंद गिरी जी महाराज ने की थी।मंदिर का निर्माण इंडो-आर्यन और द्रविड स्थापत्य शैली में किया गया है। मंदिर की वास्तुकला शैली मदुराई के मीनाक्षी मंदिर की तरह है। भव्य गेट मंदिर की मंदिर की भव्यता दर्शाता है। गेट पर चार बड़े हाथियों की मूर्ति है।मंदिर परिसर के भीतर अन्नपूर्णा, शिव, हनुमान और काल भैरव भगवान को समर्पित मंदिर भी हैं। मंदिर की बाहरी दीवारें अभी भी रंगीन पौराणिक चित्रों में शामिल हैं। मंदिर की दीवारों पर कृष्ण लीला का चित्रण है।नवदुर्गा में काफी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैै। मंदिर 50 साल से भी अधिक पुराना है।