मजदूरी की, कॉलेज में पढ़ाया, अधिवक्ता बने
इंदौर में बीते शुरुआती दिनों में आनंद मोहन माथुर ने मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में भी काम किया था। उन्होंने कॉलेज में बच्चों को भी पढ़ाया। अधिवक्ता बनने के बाद उन्हें जो केस फीस मिलती थी, उसका बड़ा हिस्सा वे समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च करते थे। उन्होंने अपने खर्च पर इंदौर की कान्ह नदी पर एक झूला ब्रिज बनवाया। साथ ही, आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी कराया। उन्होंने अपनी बेशकीमती जमीन समाज से जुड़े कामों के लिए दे दी थी।
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बेटी को विदा कर भोपाल रवाना हुए
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर के जीवन का एक किस्सा भोपाल गैसकांड से भी जुड़ा है। दरअसल, जिस दिन भोपाल में गैसकांड हुआ, उसी दिन उनकी बेटी पूनम माथुर की शादी थी। देर रात आनंदजी को भोपाल से बुलावा आया कि वे जितनी जल्दी हो सके, भोपाल आ जाए। ऐसे में माथुर ने बेटी पूनम को विदा किया और फिर तुरंत भोपाल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने ही इस गैसकांड के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई थी और डाउ केमिकल फैक्टरी पर मुआवजा देने के लिए दबाव बनाया।
बगावती तेवर रहे माथुर के
माथुरजी वैसे परोपकारी और दरियादिल थे। लेकिन, अन्याय के खिलाफ उनके तेवर हमेशा बगावती रहते थे। उन्होंने सरकार के खिलाफ कई याचिकाएं लगाईं और आंदोलनों में भी हिस्सा लिया। बिना कोई फीस लिए उन्होंने कई गरीब निर्धन परिवारों के केस लड़े और उन्हें न्याय दिलाया। कई जनहित याचिकाएं भी उन्होंने प्रदेश और शहर की भलाई के लिए लगाई। मच्छीबाजार सड़क निर्माण, शेखर नगर बस्ती हटाने के विरोध में उन्होंने सड़क पर आकर लड़ाई लड़ी।
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94 साल की उम्र में सीखा हारमोनियम
आनंद मोहन माथुर संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने 94 साल की उम्र में हारमोनियम सिखा। इसके बाद वे हर दिन उस पर रियाज भी किया करते थे। वे हिंदी के अलावा अंग्रेजी, मराठी और गुजराती भाषा भी जानते थे।
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