चुनावी साल में मालवा-निमाड़ में सत्ता, संगठन और संघ की हलचलें बढ़ गई हैं। हाल ही में इंदौर में हुई संघ की समन्वय बैठक में खासकर निमाड़ को लेकर संघ ने अपने फीडबैक में कमजोर स्थिति की तरफ इशारा किया है। पिछले चुनाव में खरगोन जिले की एक भी सीट भाजपा नहीं जीत पाई थी। पांच सालों में मालवा-निमाड़ में नया नेतृत्व नहीं उभरा और भाजपा की जमीनी पकड़ कमजोर हुई है। ऐसे में अब संघ यहां नेतृत्व तैयार करने में मददगार साबित हो रहा है। उसके पसंदीदा लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं।