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इंदौर में आरएसएस की बैठक: युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रहेगी नजर, नशे के खिलाफ छेड़ेगा अभियान

Tue, 03 Nov 2026 04:36 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देगा। इंदौर में चल रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए अभियान चलाने और सामाजिक दायरा बढ़ाने पर चर्चा हुई।
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भोजशाला के इतिहास पर प्रदर्शनी - फोटो : amarujala
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विस्तार
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आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक मंगलवार को भी जारी रही। बैठक में प्रांत के बजाय बनाए जा रहे संभागों के पदों को लेकर मंथन हुआ। जल्द ही नए पदों की जिम्मेदारियां भी संघ स्वयंसेवकों को सौंपी जाएंगी, ताकि मार्च में होने वाले संगठनात्मक चुनाव में वे पदाधिकारी अन्य पदों के लिए अपना मत प्रकट कर सकें।

अभी तक प्रांत कार्यवाह होते थे, लेकिन अब प्रांत के बजाय संभाग स्तर पर जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर के बजाय राज्य स्तर पर पदों का गठन होगा। संघ अपने परंपरागत विषयों के साथ तो आगे बढ़ेगा ही, लेकिन अब युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी नजर रखेगा। सबसे पहले नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। संघ इस दिशा में दूसरे संगठनों के साथ भी सहभागिता करेगा।

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संस्थाओं को भी अपने साथ जोड़ेगा संघ

बैठक में तय किया गया है कि संघ अपना सामाजिक दायरा बढ़ाएगा। इसके लिए सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं को भी अपने साथ जोड़ेगा और उनके आयोजनों में भाग लेगा। इन संस्थाओं के साथ होने वाले आयोजनों के जरिए संघ अपने विचारों को आगे बढ़ाएगा। बैठक में बताया गया कि शताब्दी वर्ष में भी अन्य संस्थाओं के साथ देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

भोजशाला के इतिहास पर प्रदर्शनी

धार की ऐतिहासिक भोजशाला के अतीत से लेकर वर्तमान विवाद तक की कहानी आरएसएस की बैठक में तस्वीरों और 24 ऐतिहासिक पड़ावों के जरिए प्रस्तुत की गई है। इस प्रदर्शनी का नाम 'भोजशाला के प्रत्यक्ष प्रमाण' दिया गया है। इसे बैठक स्थल पर लगाया गया है। इसमें भोजशाला के स्थापत्य, शिलालेखों, स्तंभों, धार्मिक प्रतीकों और पुरातात्विक अवशेषों के फोटो लगाए गए हैं।

प्रदर्शनी की खासियत यह है कि भोजशाला के इतिहास को किसी एक घटना तक सीमित न रखते हुए राजा भोज के शासनकाल और भोजशाला की स्थापना से लेकर मध्यकालीन आक्रमणों, वाग्देवी की प्रतिमा के लंदन पहुंचने, अंग्रेजों के पुरातात्विक अध्ययन और आजादी के बाद हुए आंदोलनों तक की घटनाओं को क्रमवार दिखाया गया है।प्रदर्शनी में प्राकृत भाषा में लिखे परिजात मंजरी और विजयश्री नाटिका से संबंधित शिलालेखों के फोटो भी रखे गए हैं।

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