आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मैकाले की शिक्षा प्रणाली और मार्क्सवादी विचारों के कारण देश राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद भी भौतिक गुलामी में दशकों तक रहा। समाज को गुलामी के गहरे प्रहार से मुक्त होना चाहिए। होसबाले सोमवार को आरएसएस मालवा प्रांत के नए भवन का लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। इसका नाम सुदर्शन भवन दिया गया है। भवन का निर्माण डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति ने किया है।
संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि गुलाम मानसिकता के कारण हिंदुत्व को नकारने, घृणा करने की प्रवृत्ति बौद्धिक वर्ग, विश्वविद्यालय, मीडिया और पाठ्यक्रमों में वर्षों तक कायम रही। इस प्रवृत्ति के कारण समाज को जिस प्रकार से विकसित होना चाहिए था, वैसा नहीं हो पाया। समाज को समय-समय पर ठीक करने के लिए कई लोगों ने प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। होसबोले ने कहा कि भारतीयता, स्वदेशी और हिंदुत्व को लेकर संघ का आग्रह हमेशा रहा है, क्योंकि एक राष्ट्र के स्वाभिमान की समझ आगे बढ़े। उसके बल पर ही देश विकसित होना चाहिए। देश के स्वाभिमान को यदि हम भूल गए तो देश नाश की तरफ जाएगा, इसलिए स्वतंत्रता के आंदोलन करने वालों ने देश के मौलिक आधार पर ही जोर दिया, लेकिन स्वतंत्रता के बाद देश के स्वाभिमान पर आघात हुआ, इसका अनुभव हम करते हैं।
समाज ही संघ
होसबाले ने कहा कि वर्षों तक संघ ने बगैर कार्यालय के काम किया। अब जिला स्तर पर कार्यालय खुलने लगे हैं। यह विचार शुरू से रहा है कि संघ की कोई प्रॉपर्टी न हो। समाज का हर घर संघ का कार्यालय है, क्योंकि समाज ही संघ है।