रक्षाबंधन पर अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक कृष्णा गुरुजी ने इंदौर के कुष्ठ आश्रम में महिलाओं से राखी बंधवाई। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में उपेक्षित, असहाय या रोगग्रस्त वर्ग के साथ त्योहार मनाने की परंपरा शुरू करें। अगर, एक भी बहन को यह महसूस हो जाए कि वह तिरस्कृत नहीं है, तो यही सच्चे रक्षाबंधन की जीत होगी।
रक्षाबंधन को सामान्यतः भाई-बहन के रिश्ते और रक्षा-संकल्प का प्रतीक माना जाता है। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक कृष्णा गुरुजी ने इस पर्व को मानव सेवा और सामाजिक संवेदना से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायी पहल शुरू की है।
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आज रक्षाबंधन के अवसर पर कृष्णा गुरुजी इंदौर के परदेशीपुरा स्थित बीमा अस्पताल के कुष्ठ रोगी सेवा सदन आश्रम पहुंचे। जहां उन्होंने आश्रम में रह रही उपेक्षित महिलाओं से राखी बंधवाई और उन्हें आजीवन सुरक्षा व सम्मान देने का वचन दिया। यह पहल केवल एक रस्म नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देती है कि सच्चा रक्षाबंधन उन बहनों के साथ है जिन्हें समाज ने अक्सर नजरअंदाज किया है। कृष्णा गुरुजी ने कहा कि हम हमेशा रक्षा का वचन देते हैं, पर समाज की उपेक्षित बहनों से कभी रक्षा का आशीर्वाद लेने की भावना क्यों नहीं लाते? कृष्णा गुरुजी ने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में उपेक्षित, असहाय या रोगग्रस्त वर्ग के साथ त्योहार मनाने की परंपरा शुरू करें। अगर, एक भी बहन को यह महसूस हो जाए कि वह तिरस्कृत नहीं है, तो यही सच्चे रक्षाबंधन की जीत होगी।
पर्व सामाजिक जागृति का माध्यम
बता दें कि पिछले 9 वर्षों से कृष्णा गुरुजी गणेश चतुर्थी पर कुष्ठ आश्रम में गणेश स्थापना कर रहे हैं। अब उन्होंने रक्षाबंधन को भी सेवा, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बना दिया है। उनका मानना है कि पर्व केवल दिखावा नहीं, बल्कि सामाजिक जागृति का माध्यम बनना चाहिए।