पाक्सो एक्ट के एक मामले में जिला कोर्ट ने आरोपी और उसके दोस्त को बरी कर दिया है। कोर्ट में सामने आया कि प्रेमिका ने अपनी मां के दबाव में अपने प्रेमी और उसके दोस्त पर केस दर्ज करवाया था। युवक और युवती के बीच में लंबे समय से संबंध थे और जब केस दर्ज करवाया गया तब युवती बालिग थी। घटना 18-12-2022 में हुई और जिला कोर्ट ने 19-04-2024 को आरोपियों को बरी किया।
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युवक और युवती के बीच थे प्रेम संबंध
अधिवक्ता रजत रघुवंशी ने बताया कि बाणगंगा थाने में दर्ज मामले में आरोपी मन और अनुज को बरी किया गया है। 13वें अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा विशेष पाक्सो एक्ट ने केस में फैसला सुनाया। दोनों पर पाक्सो और अन्य धाराओं में केस दर्ज थे। अधिवक्ता रजत रघुवंशी ने बताया कि कोर्ट में युवती और उसकी मां युवती के नाबालिग होने के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई। युवती ने शिकायत में यह भी बताया था कि दोनों आरोपी उसे बाइक पर जबरदस्ती हाथ पांव बांधकर बैठाकर ले गए थे। युवती की एक सहेली ने इस बात को भी खारिज करते हुए बयान दिया कि युवती खुद उसके सामने युवक के साथ सहमति से गई थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि युवक और युवती के बीच प्रेम संबंध थे। इन सभी आधार पर कोर्ट ने मन और अनुज को बरी किया।
और इस तरह सामने आया सच...
अधिवक्ता रजत रघुवंशी युवती ने अपनी मां के दबाव में युवक और उसके दोस्त पर केस दर्ज करवाया था। युवती की मां को दोनों के बीच प्रेम संबंध की भी जानकारी नहीं थी। कोर्ट में युवती की मां युवती के जन्म से संबंधित दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाई। जो जन्म प्रमाण पत्र दिया गया वह इंदौर में बना था और युवती का जन्म उप्र के बलिया में हुआ था। इस आधार पर कोर्ट ने वह जन्म प्रमाण पत्र खारिज कर दिया। कोर्ट ने युवती की मां से शादी का समय पूछा और उस आधार पर युवती के जन्म का समय जांचा। इसमें युवती घटना के वक्त बालिग निकली।