350 करोड़ की लागत से तैयार महाकाल लोक की मूर्तियां खंडित होने के मामले में हाई कोर्ट में लगी जनहित याचिका निरस्त हो गई। कोर्ट ने इसे सुनवाई योग्य नहीं माना। कोर्ट ने अपने 9 पेज के फैसले में कहा कि खंडित मूर्तियों के मामले में लोकायुक्त जांच जारी है। याचिकाकर्ता चाहें तो याचिका में उठाए गए बिंदु वहां रख सकते हैं।
उज्जैन मेें 30 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से चली हवा के बाद महाकाल लोक की छह मूर्तियां खंडित हो गई थी। इसे लेकर सरकार की काफी किरकिरी भी हुई थी। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने हाई कोर्ट में इस मामले में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिका में उन्होंने निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि निविदा में शर्त रखी गई थी कि मूर्तियां गुणवत्तापूर्ण होंगी लेकिन मूर्तियों की गुणवत्ता किसी ने जांची ही नहीं। मूर्तियां तेज हवा के हिसाब से डिजाइन नहीं की गई थी, लेकिन निविदा शर्त में इसका उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि अफसरों नेे प्रतिमाअेां की गुणवत्ता नहीं परखी।
मूर्तियों को भीतर से खोखला रखा गया था। इस कारण वे हवा का दबाव नहीं झेल पाई। याचिकाकर्ता ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। कोर्ट ने दोनो पक्षों के जबाव सुने। इसके बाद कोर्ट ने याचिका निरस्त करते हुए इसे चलन योग्य नहीं माना है।