देवी अहिल्या बाई के नाम पर विवाद है, इस विवाद की वजह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में गौतम मुनि की पत्नी के नाम "अहल्या" शब्द के कारण है। जानिए, क्या है विवाद
देवी अहिल्या बाई के नाम को लेकर यह विवाद बना रहता है कि उनका नाम अहल्या है या अहिल्या। अहिल्या शब्द को लेकर विद्वानों की राय अलग-अलग है। विवाद की वजह महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में गौतम मुनि की पत्नी का नाम "अहल्या" शब्द का प्रयोग किया है। किसी नाम की यह प्रमाणिकता नहीं की प्राचीन ग्रंथ में उपयोग शब्द सही होगा। संस्कृत साहित्य में अधिकतर 'अहल्या' शब्द का उपयोग होता है। कुछ प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है की देवी 'अहल्या' नहीं बल्कि 'अहिल्या' शब्द अधिक प्रामाणिक है।
अहिल्या नाम की प्रामाणिकता का आधार
केदारनाथ के गौरीकुंड के तप्तकुंड पर लगे शिलालेख में संवत 1815 लिखित है और जानकारी में मल्हारराव और देवी अहिल्या बाई होलकर के नाम शिलालेख पर दर्ज हैं। चंद्रचूड़ दफ्तर में संगृहित पत्रों में जो खुद देवी अहिल्या बाई ने मालेराव को लिखे थे, में उन्होंने अपना नाम देवी अहिल्या बाई होल्कर लिखा था। अहिल्या बाई के दरबार महेश्वर दरबार में पेशवा की ओर से नाना फडणवीस ने विट्ठल शामराज और केसो भीकाजी को अपना वकील नियुक्त कर रखा था। इन दोनों वकीलों द्वारा पेशवा को भेजे पत्रों में 'अहिल्या' नाम का उपयोग किया था। इसी तरह 'महेश्वर दरबारची बातमी पत्रे' ग्रंथ में देवी अहिल्या बाई शब्द का उपयोग हुआ है। पेशवा माधवराव बल्लाल ने 11 दिसंबर 1767 के पत्र में 'राजेश्री अहिल्या बाई होलकर' नाम से संबोधित किया था। इसी तरह होलकर शाहीचा इतिहास में पत्र व्यवहार में देवी अहिल्या बाई होलकर नाम का उपयोग किया है। इस तरह कई प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर कहा जा सकता है कि देवी अहिल्या बाई होलकर ही सही नाम है।