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MP: अमानक दवाओं से गई मरीजों की जान, आरोपियों को बचा रही सरकार, डॉक्टरों ने लगाए गंभीर आरोप

Fri, 21 Feb 2025 05:14 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं के चलते कई मरीजों की मौत हो गई, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन कर व्यवस्था में सुधार की मांग की।
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डॉक्टरों ने किया विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर में सरकारी डॉक्टर्स ने बड़ा खुलासा किया है। इंदौर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में कई संगठनों के डॉक्टर्स ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में अमानक स्तर की दवाएं भेजी जा रही हैं, जिससे कई मरीजों की जान चली गई। डॉक्टरों को जब शक हुआ तो उन्होंने इसकी शिकायत की और बाद में इस मामले की जांच भी हुई। जांच के बाद इस पूरे मामले को दबा दिया गया और आरोपियों को बचा लिया गया।  
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प्रतीकात्मक रूप से दवाओं को जलाया गया
इंदौर में एमटीए, जेडीए और मेडिकल ऑफिसर्स मेडिकल एजुकेशन ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रतीकात्मक रूप से दवाओं को जलाया। विरोध प्रदर्शन में पहुंचे डॉक्टरों ने कहा कि अमानक दवाओं के मामले में कई कंपनियों के नाम सामने आए, लेकिन सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई। डॉ. राहुल रोकड़े और डॉ. अशोक ठाकुर ने कहा कि मरीजों की मौत पर परिजन डॉक्टरों से मारपीट करते हैं। हम कब तक ये सब सहन करते रहेंगे? इतना बड़ा घोटाला हुआ और किसी पर भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार न तो डॉक्टरों को सुरक्षा दे रही है और न ही व्यवस्था में सुधार कर रही है। यदि इसी तरह से चलता रहा तो डॉक्टरों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।  

भारत में सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते डॉक्टर
विरोध प्रदर्शन में आए डॉक्टरों ने कहा कि आज के युवा डॉक्टर सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते। वे पढ़-लिखकर सीधे विदेश चले जाते हैं। देश की स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर होती जा रही हैं और सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। यदि यही हालात जारी रहे तो आने वाले समय में गरीब लोगों को इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाएगा।  
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आयुष्मान का डब्बागोल, सरकारी अस्पताल बंद करने पर तुली है सरकार
डॉक्टरों ने कहा कि आयुष्मान योजना में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं और प्राइवेट अस्पतालों को इलाज का भुगतान नहीं किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में मरीज के आने के बाद उसे हर तरह का इलाज तुरंत मिल जाता है, लेकिन सरकार आयुष्मान के नाम पर सरकारी अस्पतालों को बंद करने की सोच रही है, जो पूरी तरह से असफल योजना साबित होगी। इससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी।
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