इंदौर जिले की सीटों पर भाजपा उम्मीदवार जीत चुके है। इसके साथ ही प्रदेश के मंत्रीमंडल में इंदौर के पांच विधायकों का दावा मंत्री पद के लिए मजबूत हो चुका है। ये सभी विधायक चार से पांच बार चुनाव जीत चुके है। एक नंबर से चुनाव जीते विजयवर्गीय खुद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में है। इसके अलावा प्रदेश में सबसे बड़ी जीत दर्ज कराने वाले रमेश मेंदौला चार बार से लगातार चुनाव जीत रहे है, लेकिन एक बार भी मंत्री नहीं बने है। मेंदौला के अलावा महेंद्र हार्डिया, तुलसी सिलावट, मालिनी गौड़, उषा ठाकुर का दावा भी मंत्री पद के लिए मजबूत है।
विजयवर्गीय मंत्री नहीं बने तो मेंदौला का दावा मजबूत
लोकसभा चुनाव तक लगता नहीं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री न बनए। इस स्थिति में विजयवर्गीय को मंत्रीमंडल में या संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है, हालांकि विजयवर्गीय मंत्रीपद से इस्तीफा देकर ही संगठन के काम में जुटे थे। यदि विजयवर्गीय मंत्री नहीं बनते है तो फिर मैंदोला का दावा मंत्री पद के लिए सबसे मजबूत रहेगा।
महिला कोटे से उषा या मालिनी
मंत्रीमंडल में महिला विधायक भी शामिल होंगी। बुरहानपुर से चुनाव जीती अर्चना चिटनीस भी मंत्री बन सकती है, लेकिन इंदौर जिले से चुनाव जीती उषा ठाकुर और मालिनी गौड़ में से भी किसी एक को मौका मिल सकता है। उषा पहले मंत्री रह चुकी है, इसलिए इस बार उनका मंत्रीमंडल में शामिल होने का दावा कमजोर रहेगा।
सिंधिया लगा सकते है सिलावट के लिए जोर
चार साल पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में तुलसी सिलावट केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के सेनापति है। सिंधिया उन्हें दोबारा मंत्री बनाने के लिए जोर लगा सकते है। मालवा निमाड़ में उनके खेमे से सबसे मजबूत दावेदार सिलावट ही है। लगातार पांच बार जीत दर्ज कराने वाले महेंद्र हार्डिया मंत्री पद के दावेदार है। पहले वे स्वास्थ्य मंत्री रह चुके है, लेकिन पिछली सरकार में उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया था।
मालवा निमाड़ से इन्हें मिल सकता है मंत्रीपद
मालवा निमाड़ से विजय शाह, नागर सिंह चौहान, मोहन यादव, राजकुमार मेव, अेामप्रकाश सखलेचा, गायत्री राजे पंवार, जगदीश देवड़ा, हरदीप सिंह डंग, चैतन्य कश्यप, राजेद्र पांडे, चिंतामण मालवीय भी मंत्री पद की दौड़ में है।