इंदौर नाम के साथ इंदौर महू ही कहा जाता है ऐसा प्रतीत होता है की यह जुड़वा नगर है। वास्तव में महू अब इंदौर का एक उप नगर हो गया है। महू देश का मुख्य सैन्य छावनी का केंद्र है। इसे सर जॉन मॉल्कम ने 1818 की मंदसौर संधि के बाद इंदौर के समीप अंग्रेज सैन्य छावनी के लिए चुना था। सुंदर पहाड़ियों और वादियों के कारण महू को उपयुक्त माना था। वैसे महू डॉ भीमराव आंबेडकर की जन्म स्थली के लिए भी जाना जाता है।
महू विधानसभा क्षेत्र 1952 के प्रथम चुनाव में मध्यभारत के क्षेत्र का हिस्सा रहा है। पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस के आरसी जाल निर्वाचित हुए थे। 1957 से 1980 तक कांग्रेस का महू विधानसभा पर कब्ज़ा रहा। आरसी जाल ने विजय की हैट्रिक बनाई थी। जाल पारसी समुदाय के थे और महू में पारसी वोट के साथ जाल की छवि सभी जनमानस पर अंकित थी। 1972 के चुनाव में महू से कांग्रेस के प्रकाशचंद्र सेठी निर्वाचित हुए थे। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। महू से इसके बाद मंत्री का पद निर्वाचित प्रतिनिधियों को मिलता रहा। वर्ष 1977 से 2003 यहां से विजय होने वाले या पराजित होने वाले पाटीदार बंधू रहे, जाहिर है पाटीदार बंधुओं की तीन दशक तक जय -पराजय में भूमिका रही है।
जीत-हार की हैट्रिक
महू क्षेत्र का एक विचित्र संयोग है कि आरसी जाल तीन बार लगातार निर्वाचित रहे। भेरूलाल पाटीदार तीन बार विजय रहे, 4 बार पराजित हुए। घनश्याम पाटीदार दो बार विजयी रहे, एक बार पराजित। अंतरसिंह दरबार दो बार विजय रहे, लगातार 3 चुनावों में पराजित हुए हैं। 2003 के बाद से महू के लिए उम्मीदवार इंदौर के निवासी नेता बनते रहे। दो बार कैलाश विजयवर्गीय निर्वाचित हुए और प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे। 2018 में उषा ठाकुर निर्वाचित हुईं और मंत्रिपद पर काबिज रहीं। इस बार भी उषा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। हालांकि इस बार स्थानीय को टिकट देने की मांग उठ रही थी। कांग्रेस के प्रबल दावेदार अंतरसिंह दरबार को कांग्रेस ने इस बार टिकट नहीं दिया है। कांग्रेस की ओर से रामकिशोर शुक्ला को टिकट दिया गया है, जिसका विरोध हो रहा है। हाल ही में शुक्ला भाजपा से बगावत कर कांग्रेस के शामिल हुए। अंतरसिंह दरबार और उनके समर्थक टिकट न मिलने से नाराज हो गए हैं और कांग्रेस के उम्मीदवार का विरोध शुरू हो गया है।
रोचक जानकारी
- आरसी जाल और भेरूलाल पाटीदार ने महू से जीत की हैट्रिक बनाई है। वहीं अंतरसिंह दरबार ने पराजय की।
- महू के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी विजय 1972 में प्रकाश चंद्र सेठी के नाम दर्ज है, जो 15225 मतों से जीते थे। सबसे कम मतों से जीत 1977 में कांग्रेस के घनश्याम पाटीदार की है जो 249 मतों से हुई थी।
- 1977 की जनता लहर में भी कांग्रेस ने महू से विजय हासिल की थी।
- 2018 के चुनाव में महू में मतदान प्रतिशत 79.3 अभी तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत रहा है।
विधानसभा क्षेत्र महू का इतिहास
क्रमांक चुनाव वर्ष विजयी प्रत्याशी पार्टी निकटतम प्रतिद्वंद्वी पार्टी
1 1957 जाल रुस्तमजी कांग्रेस तुलसीराम निर्द
2 1962 जाल रुस्तमजी कांग्रेस नारायण प्रसाद जी निर्द
3 1967 आर सी जाल कांग्रेस के रामनारायण जनसंघ
4 1972 प्रकाश चंद्र सेठी कांग्रेस कृष्णगोपाल माहेश्वरी जनसंघ
5 1977 घनश्याम पाटीदार कांग्रेस भेरूलाल पाटीदार जपा
6 1980 घनश्याम पाटीदार कांग्रेस भेरूलाल पाटीदार भाजपा
7 1985 भेरूलाल पाटीदार भाजपा घनश्याम सेठ पाटीदार कांग्रेस
8 1990 भेरूलाल पाटीदार भाजपा पी डी अग्रवाल कांग्रेस
9 1993 भेरूलाल पाटीदार भाजपा अशोक पाटनी कांग्रेस
10 1998 अंतरसिंह दरबार कांग्रेस भेरूलाल पाटीदार भाजपा
11 2003 अंतरसिंह दरबार कांग्रेस भेरूलाल पाटीदार भाजपा
12 2008 कैलाश विजयवर्गीय भाजपा अंतरसिंह दरबार कांग्रेस
13 2013 कैलाश विजयवर्गीय भाजपा अंतरसिंह दरबार कांग्रेस
14 2018 उषा ठाकुर भाजपा अंतरसिंह दरबार कांग्रेस