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Indore: स्वच्छता का ताज बरकरार रख पाना इस बार इंदौर के लिए नहीं होगा आसान

Mon, 17 Apr 2023 05:54 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र और पॉश इलाकों में तो सफाई बेहतर है, लेकिन बस्तियों और पिछड़े इलाकों में अब कचरे के ढेर नजर आने लगे है। सख्ती कम होने और गंदगी फैलाने पर जुर्माने में ढिलाई करने का असर सफाई व्यवस्था पर साफ देखा जा सकताा है।  
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नालों में इस तरह बिखरी पड़ी है गंदगी। - फोटो : amar ujala digital
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'मनाएं स्वच्छता का त्यौहार सातवीं बार'यह गीत रोज इंदौर में कचरा लेने आए वाहनों पर बजता है, लेकिन इंदौर सातवीं बार फिर स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर आ जाए। ऐसे प्रयास इस बार कम नजर आ रहे है। इस बार स्वच्छता का अभियान प्रभाव नहीं छोड़ पा रहा है। बेकलेनों में फिर कचरा नजर आने लगा है। नालों में गंदगी और गाद फिर दिखाई दे रही है। अगले माह से सर्वेक्षण शुरु हो जाएगा। सूरत, नवीं मुबंई, विजयवाड़ा जैसे शहर भी स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर आने के लिए इंदौर को टक्कर दे रहे।

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शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र और पॉश इलाकों में तो सफाई बेहतर है, लेकिन बस्तियों और पिछड़े इलाकों में अब कचरे के ढेर नजर आने लगे है। सख्ती कम होने और गंदगी फैलाने पर जुर्माने में ढिलाई करने का असर सफाई व्यवस्था पर साफ देखा जा सकता है। पहले लोग जुर्माने के डर से बेकलेन में कचरा नहीं फेंकते थे, लेकिन अब फिर शहर की ज्यादातर बेकलेन में गंदगी पड़ी रहती है और कई दिनों तक नहीं उठती है। इसके अलावा पिछले साल वाटर प्लास में सेवन स्टॉर रैटिंग की वजह से इंदौर ने बढ़त बनाई थी, लेकिन इस साल नदी नाले पिछले साल की तरह साफ नजर नहीं आ रहे है।

इस बार सफाई में ऐसे हो रही ढिलाई

-हर साल ठोस अभियान के दम पर निगम ज्यादा नंबर लाने में सफल रहता है। पिछले साल शहर के नाले खत्म करने के अभियान ने प्रभाव छोड़ा था। इस बार सिर्फ नो थू-थू अभियान की औपचारिकता नगर निगम ने निभाई।
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-बेकलेन से कचरा ठीक से नहीं उठ पा रहा है। नालियों में कचरा फेंकने की प्रवृति फिर शहरवासियों में बढ़ गई है। पहले चालानी कार्रवाई के डर से कचरा पीछे नहीं फेंका जाता था, लेकिन अब नगर निगम दंड को लेकर ज्यादा सख्त नहीं है।

-ट्रैंचिंग ग्राउंड में पहले कचरे के पहाड़ खत्म कर वहां गार्डन बना दिए गए थे। शत प्रतिशत कचरे का निपटान हो रहा था, लेकिन अब फिर कचरे के पहाड़ ग्राउंड पर दिखाई देने लगे है और दो बार उनमें आग लगने की घटनाएं भी हो चुकी है।

-कचरा संग्रहण करने वाले ज्यादातर वाहन खटारा हो चुके है। खराब होने के कारण वाहन गलियों में समय पर नहीं पहुंच पा रहे है। इस कारण लोग इधर-उधर कचरा फेंक देते है।

तीन शहर दे रहे है इंदौर को टक्कर
इंदौर से स्वच्छता रैंकिंग का खिताब छिनने के लिए सूरत,नवी मुबंई और विजयवाड़ा जैसे शहर प्रयासरत है। सूरत पिछले साल दूसरे नंबर पर था। घर-घर कचरा संग्रहण सिस्टम सूरत में प्रभावी रुप से काम कर रहा है। शहर की सड़कों पर कैमरे लगाकर निगरानी रखी जा रही है। जो कचरा फेंकता नजर आता है, उससे दंड भी वसूला जा रहा है। नवी मुुबंई में भी कचरे से बिजली उत्पादन हो रहा है। इंदौर में सीएनजी प्लांट तो लगाया गया, लेकिन वह ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहा है।

सातवीं बार भी इंदौर आएगा पहले स्थान पर
मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि सातवीं बार भी इंदौर स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर आएगा। हमने नो थू-थू अभियान भी चला रखा है। जनभागीदारी के प्रयास भी हो रहे है।

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