तापमान बढ़ने के साथ ही इंदौर में जलसंकट गहराने लगा है। शहर के कई इलाकों में टैंकरों से जल वितरण करना पड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बोरिंगों का बंद होना है। इंदौर में ज्यादातर घरों में बोरिंगों से जलापूर्ति हो जाती है। गर्मी में कई बोरिंगों ने या तो पानी देना बंद कर दिया है या फिर उनमें पानी का दबाव कम हो गया है। इस कारण शहर के ज्यादातर इलाके नर्मदा जल पर निर्भर हो चुके हैं। नलों में आ रहा कम पानी शहर में रोज जलापूर्ति होती है, लेकिन नलों में भी पानी का प्रेशर कम हो गया है। लोग पंप लगाकर पानी खींचते हैं। इस कारण दूसरे घरों में नल नहीं आते हैं। जलसंकट को देखते हुए नगर निगम ने 100 से ज्यादा टैंकर किराए पर ले रखे हैं। हर वार्ड में एक टैंकर जल वितरण के लिए भेजा है। जो वार्ड क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़े हैं। वहां दो टैंकरों की डिमांड आने लगी है। यह खबर भी पढ़ें- शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा, राजनीति से बाहर हो जाएंगे ऐसे नेता मेयर ने दिए जांच के निर्देश शहर की कई काॅलोनियों में पानी ठीक से नहीं मिलने की समस्या को देखते हुए सोमवार सुबह महापौर पुष्यमित्र भार्गव बिजलपुर स्थित नर्मदा नियंत्रण कक्ष पर निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने पानी की टंकियों में वितरण के सिस्टम को मॉनिटरिंग व्यवस्था का अवलोकन किया। वांचू पाइंट से पानी कम क्यों आ रहा है, इसको लेकर अधिकारी कर्मचारियों से जानकारी ली। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर इसके लिए जांच के निर्देश भी दिए। उन्होंने इंदौर तक आने वाले पानी की चोरी को रोकने के लिए भी कहा है। महापौर ने कहा कि मेरे लिए पूरा शहर एक समान है, इसलिए टंकियों में पानी के वितरण में कोई भी अधिकारी, पार्षद पक्षपात न करे।