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Indore: अस्पताल से डिस्चार्ज होकर आश्रम पहुंचे सियाराम बाबा, भक्तों से मुलाकात शुरू

Wed, 04 Dec 2024 01:28 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

संत सियाराम बाबा नर्मदा किनारे अपने आश्रम में रहते है और हनुमान जी की भक्ति करते है। उनकी उम्र 100 साल से ज्यादा है। वे हमेशा रामचरित मानस का पाढ करते है। बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था।
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सियाराम बाबा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खरगोन के समीप नर्मदा तट किनारे भट्यान गांव के आश्रम में रहने वाले संत सियाराम बाबा की अस्पताल से छुट्टी हो गई और अब वे फिर से भक्तों से मुलाकात करने लगे है, हालांकि डाक्टर उन्हें दो दिन और डिस्चार्ज करने के पक्ष में नहीं थे,लेकिन बाबा के आश्रम जाने की जिद के कारण उन्हें छुट्टी दे दी गई। संत सियाराम बाबा को निमोनिया हो गया था। उनके बीमार होने की जानकारी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनका हाल चाल जाना था।

 

उनका इलाज का रहे चिकित्सकों को कहना है कि बाबा के स्वास्थ्य में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। वे आश्रम जाना चाहते थे, इसलिए उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई,लेकिन उनकी सेहत पर निगरानी रखी जा रही है। बाबा के सेवकों को भी कहा गया कि दवाई के डोज नियमित तौर पर बाबा को दिए जाए और खुली हवा के बजाए आश्रम के भीतर ही बाबा भक्तों से मुलाकात करे।

 

संत सियाराम बाबा को गत दिनों निमोनिया की शिकायत होने के बाद सनावद के अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें काफी कमजोरी आ गई थी। डाक्टरों ने उन्हें स्लाइन भी चढ़ाई थी। तबीयत खराब होने के कारण संत के अनुयायी भी अस्पताल में पहुंचे थे, हालांकि भक्तों को बाबा के स्वास्थ्य का हवाला देकर मिलने नहीं दिया गया।

दान में केवल दस रुपये लेते है बाबा

संत सियाराम बाबा नर्मदा किनारे अपने आश्रम में रहते है और हनुमान जी की भक्ति करते है। उनकी उम्र 100 साल से ज्यादा है। वे हमेशा रामचरित मानस का पाढ करते है। बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था। जो भक्त आश्रम में उनसे मिलने आता है और ज्यादा दान देना चाहता है तो वे इनकार कर देते है। वे सिर्फ दस रुपये का नोट ही लेते है। उस धनराशि का उपयोग भी वे आश्रम से जुड़े कामों में लगा देते है।

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उन्होंने नर्मदा घाट की मरम्मत के लिए ढाई करोड़ रुपये से अधिक दान किए। बताते है कि कई वर्षों तक तीर्थ भ्रमण के करने के बाद वे नर्मदा तट के भट्यान गांव पहुंचे। उन्हें वह गांव अच्छा लगा।
 

उन्होंने वहां एक पेड़ के नीचे तपस्या की और बारह वर्षों तक मौन रहकर अपनी साधना पूरी की। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने पहला शब्द सियाराम बाबा कहा तो भक्त उन्हें उसी नाम से पुकारने लगे। हर माह हजारों भक्त उनके आश्रम में आते है।

 

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