इंदौर की पाॅश कालोनी रेसकोर्स रोड में तीन लोगों के साथ हुई लूट के आरोपी का 24 घंटे बाद भी पुलिस कुछ पता नहीं लगा पाई। लुटेरे अपार्टमेंट के सीसीटीवी कैमरे में तो कैद हो गए, लेकिन पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस आयुक्त ने पांच टीमें गठित की है, जो देवास, उज्जैन व इंदौर में लुटेरों का सुराग लगाने में जुटी है, लेकिन अभी तक उन्हें पकड़ नहीं पाई है।
लूट में जिस बाइक का इस्तेमाल किया,उसे भी उन्होंने छोटी ग्वालटोली क्षेत्र से एक दिन पहले चुराया था। रेसकोर्स रोड पर लूट से पहले रविवार रात को बदमाशों ने स्कीम-78 में कार सवार एक युवक-युवती को कट्टा दिखाकर सोने की चेन लूट ली थी।
वारदात का अंदाज बाहरी गिरोह जैसा
जिस तरीके से बदमाशों ने लूट की घटना को अंजाम दिया। उससे पुलिस को आशंका है कि बाहरी गिरोह का इस लूट में हाथ हो सकता है। यूपी और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की वारदात सामने आई है।
सीमा में इस तरह के अपराध हुए है। लुटेरों के पास एक पिस्टल भी थी। जिसका उपयोग उन्होंने धमकाने के लिए किया था। दोनो बदमाशों ने टोपी भी पहन रखी थी और वारदात के लिए भी सुबह का समय चुना था, जब शहर की सड़कों पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं रहता है और वे आराम से भाग सकते है।
बदमाश जिस तरह गलियों से वाकिफ थे। उससे लगता है कि वे दो-तीन दिन से शहर में घुमकर पाॅश इलाकों की रैकी कर रहे थे। पुलिस को यूपी की गैंग पर शक है। बदमाशों की संख्या एक से ज्यादा भी हो सकती है और उनके पास अलग-अलग हथियार भी है। स्कीम-78 में लूट के दौरान उन्होंने देसी कट्टे का इस्तेमाल डराने के लिए किया था।
चाकू से काटी थी चेन
रेसकोर्स रोड से सोमवार सुबह कमलेश अग्रवाल और दिशान को लूटने के बाद उनके पड़ोसी पिकेंश शाह जब वहां आए तो उन्होंने पहले चाकू दिखाकर धमाया और फिर उसी चाकू से गले में पहनी सोने की चेन को काटा। लूट के दौरान पिकेंश के हाथ में मोबाइल भी था। बदमाशों ने पिकेंश को रिकार्डिंग नहीं करने की हिदायत दी और मोबाइल जेब में रखने को कहा था। उनके इस अंदाज से लग रहा था कि वे पहले भी लूट की वारदातों को अंजाम दे चुके है।