धर्मेंद्र भदौरिया ने आदिवासी इलाकों में ज्यादातर समय नौकरी की
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अवैध शराब के नेटवर्क की अहम कड़ी था भदौरिया
भदौरिया की नौकरी ज्यादातर आदिवासीबहुल्य जिले धार, झाबुआ, आलीराजपुर में रही। यहां से गुजरात की बार्डर करीब है। गुजरात में शराबबंदी है। मध्य प्रदेश से ही सबसे ज्यादा अवैध शराब गुजरात जाती है। इस सिंडिकेट में एक किरदार भदौरिया भी रहा है। इसके अलावा टैंडरों को मनचाहे ठेकेदारों को दिलवाने में भी उसकी भूमिका रहती थी। इस कारण पांच साल पहले वह निलंबित हो चुका था और सेवानिवृति तक बहाल नहीं हो पाया।
आलीराजपुर से जंगल के कई रास्ते हैं, जो गुजरात तक जाते हैं। इन रास्तों से ही अवैध शराब गुजरात तक पहुँचाई जाती है। आला अफ़सरों के साथ भी भदौरिया ने पैसे के दम पर इतनी जमावट कर ली थी कि उनका तबादला भी धार-झाबुआ और आस-पास के ज़िलों में ही होता था। वे अपनी मनचाही पोस्टिंग कराते थे।
बेटे व बेटी ने कारोबार में भी निवेश
भदौरिया के बेटे और बेटी के कारोबार में भी काली कमाई के निवेश के लिंक अफसरों को मिले है। भदौरिया का बेटा सूर्यांश रेस्तराँ, फ़िल्म निर्माण व अन्य कंपनियों में काली कमाई लगाता था। सूर्यांश के लॉकर में भी सोने के आभूषण व नकद मिले। उसने दो रेस्त्रां में भी 25 लाख का निवेश किया था और उसमें उसकी 40 प्रतिशत की साझेदारी थी।
अब तक क्या क्या मिला भदौरिया के पास
-परिवार के खातों में कुल 1 करोड़ 26 लाख रुपये जमा हैं। 20 से ज़्यादा बीमा और अन्य पॉलिसियाँ भी जाँच में मिलीं। भदौरिया के ग्वालियर स्थित आवास पर 22 लाख रुपये कीमत का सामान मिला।
- सात किलो चांदी भी बरामद हुई। लाॅकरों में सोने के अलावा हीरे के आभूषण भी मिले है। महंगी घडि़यां, हथियार भी मिले।
- बेटे और बेटी ने एक फर्म में निवेश भी किया था। इसके अलावा किसी जितेंद्र चौधरी को 3 करोड़ रुपये देने का अनुबंध भी मिला है।
-इंदौर में तीन फ्लैट मिले। जिसनी कीमत एक करोड़ से ज्यादा है। दो दफ्तर भी मिले है।
-बायपास की टाउनशिप में तीन करोड़ का प्लाॅट है। जिसका निर्माण जारी है।