एमवाय अस्पताल की सफाई, सुरक्षा, पेस्ट कंट्रोल और डेटा एंट्री का जिम्मा एक ही एजेंसी को दिया गया है। इसके लिए हर माह डेढ़ करोड़ की राशि अस्पताल प्रबंधन खर्च करता है। एक ही एजेंसी सारा काम संभाल नहीं सकती। इस कारण सफाई व्यवस्था हाशिए पर रहती है।
एमवाय अस्पताल में भर्ती दो नवजातों के अंग चूहों द्वारा कुतरे जाने के बाद उनकी मौत का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इसे सामान्य मौत बताने में जुटा है। डॉक्टर कह रहे हैं कि चूहे के काटने से मौत नहीं होती है।
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चूहाकांड सामने आने के बाद अब अस्पताल में रोगियों के परिजनों को वार्ड में भोजन लाने पर पाबंदी लगा दी गई है, जबकि अस्पताल में चूहे ठीक से सफाई नहीं होने और गंदगी के कारण ज्यादा आते हैं। हालात यह है कि मेडिकल के स्टोर रूम में भी चूहे नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार दवाएं भी खा जाते हैं। कई चूहे तो बिल्ली के आकार के दिखाई देते हैं।
हर माह डेढ़ करोड़ रुपये खर्च
एमवाय अस्पताल की सफाई, सुरक्षा, पेस्ट कंट्रोल और डेटा एंट्री का जिम्मा एक ही एजेंसी को दिया गया है। इस काम पर हर माह डेढ़ करोड़ की राशि अस्पताल प्रबंधन खर्च करता है। एक ही एजेंसी होने के कारण सारा काम संभालना मुश्किल होता है। इस कारण सफाई व्यवस्था हाशिए पर रहती है। पेस्ट कंट्रोल करने में भी खानापूर्ति की जाती है। इस कारण चूहे वार्डों के अलावा आपरेशन थिएटर, आईसीयू में भी देखे जा सकते हैं।
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राष्ट्रीय बाल आयोग तक पहुंचा मामला
दो नवजातों के अंग कुतरे जाने और फिर उनकी मौत का मामला राष्ट्रीय बाल आयोग तक पहुंचा है। इस घटना को लेकर जन स्वास्थ्य अभियान ने आयोग को पत्र लिखा था और मामले की जांच के अलावा प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
दो अफसर निलंबित
चूहा कांड मामले में बुधवार देर रात सहायक अधीक्षक मुकेश जायसवाल, प्रभारी नर्सिंग अधिकारी प्रवीणा सिंह को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा विभागाध्यक्ष डाॅ. ब्रजेश लाहोटी को नोटिस दिया गया है। मंगलवार को जिस नवजात की मौत हुई है। उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है। मौत की वजह दिल का ठीक से काम करना नहीं बताया गया है। बुधवार को हुई नवजात की मौत की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है।