स्वच्छता के क्षेत्र में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद अब इंदौर ने देश में वायु गुणवत्ता सुधारने के मामले में भी अपनी खास पहचान बनाई है। सूत्रों के अनुसार स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में शहर को देश के शीर्ष तीन शहरों में जगह मिली है। आधिकारिक परिणामों की घोषणा आज नई दिल्ली में होने वाले एक विशेष समारोह के दौरान की जाएगी।
महापौर और निगम आयुक्त आमंत्रित
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में भव्य पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में इंदौर को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव परिणामों की औपचारिक घोषणा करेंगे। समारोह में शामिल होने के लिए इंदौर के महापौर और नगर निगम आयुक्त को आमंत्रित किया गया है।
वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तर पर बनी रणनीति
इंदौर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने शहर को स्वच्छ वायु क्षेत्र बनाने के लिए बहुस्तरीय कार्ययोजना लागू की। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य हवा में मौजूद महीन कणों (PM2.5 और PM10) के स्तर को नियंत्रित करना था। इनके कारण ही इंदौर की वायु गुणवत्ता लगातार सुधरी है।
1. सड़कों की धूल पर प्रभावी नियंत्रण
शहर की प्रमुख और व्यस्त सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक मैकेनिकल और सीएनजी चालित स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। इसके साथ ही धूल को उड़ने से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव और सड़कों के किनारों को पक्का (पेविंग) किया गया है।
2. हरियाली और ग्रीन बेल्ट का विस्तार
वायु प्रदूषण को अवशोषित करने और ऑक्सीजन का दायरा बढ़ाने के लिए शहर के खाली पड़े हिस्सों, डिवाइडरों और पार्कों में बड़े पैमाने पर सघन पौधरोपण किया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों के आसपास विशेष ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए हैं।
3. निर्माण एवं तोड़फोड़ मलबे का वैज्ञानिक प्रबंधन
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए एंटी-डस्ट नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे को ढंककर सुरक्षित रूप से प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है ताकि धूल हवा में न घुले।
4. रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग
गीले कचरे के निस्तारण के लिए बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित कर स्वच्छ ईंधन का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण मलबे को प्रोसेस करके पेवर ब्लॉक, ईंटें और एग्रीगेट बनाए जा रहे हैं।
5. इलेक्ट्रिक और स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा
सार्वजनिक परिवहन बेड़े में डीजल-पेट्रोल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक बसों और ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ-साथ कचरा संग्रहण वाहनों को भी सीएनजी और ईवी में परिवर्तित किया गया है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
इंदौर के दूसरे स्थान पर रहने की खबर फिलहाल विभागीय सूत्रों के हवाले से सामने आई है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले समारोह में आधिकारिक नतीजे जारी होने के बाद ही अंतिम स्थिति और अंकों का पूरा ब्यौरा स्पष्ट हो सकेगा।