पीथमपुर में होगा विषैले कचरे का निपटान।
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भोपाल में गैस त्रासदी की वजह बने कचरे को चालीस साल बाद पीथमपुर लाया जा रहा है। पीथमपुर में इसका निपटान होगा। कचरे को भस्मक में जलाया जाएगा और जो जलने योग्य नहीं है, उसे लैंडफील किया जाएगा। इसका पीथमपुर में लगातार विरोध हो रहा है, लेकिन शासन छह जनवरी से पहले पीथमपुर में कचरा लाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इसका मामला हाईकोर्ट में है। सरकार को कोर्ट में जवाब भी पेश करना है।
भोपाल में कचरे के निपटना की तैयारी शुरू हो चुकी है। 40 साल से बंद पड़ी फैक्टरी पर कंटेनर भेजे जा रहे है। प्रशिक्षित कर्मचारी ही विषैले कचरे को उठाकर कंटेनर में भरेंगे। विशेषज्ञों की निगरानी में कचरा तय प्रक्रिया अपनाकर कंटेनरों में भरा जाएगा। इसके बाद भोपाल से इंदौर तक ग्रीन काॅरिडोर बनाकर कचरे को लाया जाएगा। इस कचरे के निपटान के लिए केंद्र सरकार ने रामकी कंपनी को 136 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
337 टन कचरा जलाने में लगेंगे छह माह
रामकी कंपनी को भी तय प्रक्रिया के तहत विषैले कचरे को जलाना होगा। हर घंटे में 90 किलो कचरा जलाया जाएगा। इस लिहाज से 337 टन कचरे के निपटान में डेढ़ सौ दिन से ज्यादा का समय लगेगा। शुरुआती में प्रयोग के तौर पर कचरा जलाया जाएगा और उससे होने वाले असर का परीक्षण किया जाएगा,हालांकि वर्ष 2008 में दस टन कचरा पीथमपुर के तारापुर गांव में दफन किया जा चुका है। इस कारण गांव की नदी का पानी दूषित हो चुका है। गांव के आसपास की खेती भी इससे प्रभावित हुई है और मवेशी भी नदी का पानी पीकर बीमार हो जाते है।
ग्रामीण बोरिंग के पानी का उपयोग नहीं कर सकते है। धार और पीथमपुर के जनप्रतिनिधि कचरा जलाने का लगातार विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि इससे पीथमपुर के औद्योगिक विकास पर असर पड़ेगा। जिस जगह कचरा भस्मक लगा है। उसके पास ही आबादी क्षेत्र है। पहले जो कचरा यहां दफनाया गया है, उसकी वजह से काफी परेशानी ग्रामीणों को झेलना पड़ रही है।
केंद्रीय मंत्री व धार सांसद सावित्री ठाकुर भी कह चुकी है कि जितनी राशि कंपनी को कचरे के निपटान के लिए दी जा रही है। उतनी राशि में सूनसान क्षेत्र में फैक्टरी लगाकर कचरे को निपटान किया जा रहा है। दूसरे राज्य जिस कचरे को जलाने के लिए तैयार नहीं है। उसे पीथमपुर में क्यों जलाया जा रहा है।