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Indore: इंदौर के समीप दीपावली के दूसरे दिन निभाई युद्ध की परंपरा, जलते हिंगोट फेंके, आधा दर्जन घायल

Tue, 21 Oct 2025 08:31 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

डेढ़ घंटे तक युद्ध चला। जलते हिंगोट एक दूसरे पर फेंके गए। युद्ध में हार-जीत किसी की नहीं हुई, लेकिन शोर्य के प्रतीक के तौर पर यह परंपरा निभाई गई। हिंगोट से बचने के लिए कोई ढाल लेकर आया तो कोई हेलमेट या साफा पहन कर आया था। 
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हिंगोट युद्ध - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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इंदौर से 50 किलोमीटर दूर गौतमपुरा में वर्षों से दीपावली के दूसरे दिन हिंगोट युद्ध होता है। इसमें दो गांवों रुणजी और गौतमपुरा के ग्रामीण आमने सामने होते है। सेना का नाम होता है कलगी और तुर्रा। युद्ध की यह परंपरा मंगलवार को भी निभाई गई। अपने तरकश में हिंगोट रखकर, हाथों  में ढाल के साथ योद्धा शाम को युद्ध लड़ने जा पहुंचे मैदान में। दोनो तरफ के योद्धा का उत्साह बढ़ाने के लिए आसपास के गांवों की हजारों की संख्या में जनता आई थी।

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डेढ़ घंटे तक युद्ध चला। जलते हिंगोट एक दूसरे पर फेंके गए। कुछ दर्शक दिर्घा में भी पहुंचे। युद्ध में हार-जीत किसी की नहीं हुई, लेकिन शोर्य के प्रतीक के तौर पर यह परंपरा निभाई गई। हिंगोट से बचने के लिए कोई ढाल लेकर आया तो कोई हेलमेट या साफा पहन कर आया था। फिर भी आधा दर्जन योद्धा हिंगोट लगने से घायल हो गए। हिंगोट खत्म होने के बाद युद्ध समाप्ति की घोषणा हुई। दर्शकों को हिंगोट से बचाने के लिए दर्शक दिर्घा में जालियां लगाई गई थी।

 

डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुरानी परम्परा

हिंगोट युद्ध की परंपरा डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुरानी है। अंग्रेजों के शासनकाल से यह युद्ध गौतमपुरा में खेला जाता है। एक फल के खोल में बारुद भरी जाती है। इसकी तैयारी सप्ताहभर पहले से होती है। मंगलवार को ढलते सूरज के कुछ देर पहले योद्धा मैदान में उतरे। अंधेरा होते ही सरसराते हिंगोट रोमांच पैदा कर रहे थे। उन हिंगोट को ढाल से गिराना और फिर दूसरी टीम की तरफ हिंगोट जलाकर वार करने का लुत्फ दर्शकों ने डेढ़ घंटे तक लिया। इसके बाद थके हारे योद्धा एक दूसरे से गले मिले।


दीपावली की बधाई दी और दर्शक भी अपने-अपने घरों की तरफ लौट गए। आपको बता कि इस परंपरा पर प्रतिबंध लगाने के लिए कई बार प्रयास हुए। युद्ध के दौरान एक युवक की मौत होने के कारण वर्ष 2017 में मामला कोर्ट तक गया था। इस परंपरा पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

 

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