हरी-भरी वादियों में आसान होगा सफर
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दस किलोमीटर का सुहाना सफर
महू से कालाकुंड तक दस किलोमीटर का सफर सबसे सुहाना होता है। इस ट्रैक में तीन सुरंगें आती हैं। इसके अलावा अंग्रेजों के जमाने के ब्रिज से ट्रेन गुजरती है। ट्रेन में बैठे-बैठे पातालपानी झरना यात्रियों को नजर आता है। इसके अलावा विंध्याचल पर्वत माला के पहाड़ इस सफर को और मनोहारी बनाते हैं। पहले यह ट्रेन कालाकुंड होते हुए ओंकारेश्वर तक जाती थी, लेकिन अब ओंकारेश्वर तक ब्रॉडगेज ट्रैक अलग से बन रहा है। इस कारण अब 155 साल पुराना ट्रैक सिर्फ हेरिटेज ट्रेन के लिए ही सुरक्षित रखा गया है।
होलकर राजपरिवार ने दिया था पैसा
इस ट्रैक के निर्माण के लिए अंग्रेजों को होलकर राजवंश ने भी पैसा दिया था और हाथियों के जरिए रेलवे पटरियाँ पहाड़ों पर पहुँचाई गई थीं। तब पहाड़ों को काटकर ट्रेन की पटरियाँ बिछाना आसान नहीं था। सबसे कठिन था पातालपानी के पास से बहने वाली बरसाती नदी पर रेलवे ब्रिज बनाना, लेकिन तब इतना मजबूत ब्रिज बनाया गया, जो अभी भी काम आ रहा है। दो-तीन दिन बाद फिर अब इस ट्रैक पर पर्यटक यात्रा का लुत्फ ले सकेंगे।