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Indore news: सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ को भेज सकती है सोनम रघुवंशी जमानत केस

Thu, 09 Jul 2026 08:31 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को  टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस कानूनी सवाल पर बड़ी पीठ से विचार कराने पर सोच सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध मानकर जमानत दी जा सकती है।
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सोनम रघुवंशी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस कानूनी प्रश्न को बड़ी संविधान पीठ (लार्जर बेंच) के पास भेजने पर विचार कर सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में किसी वैधानिक धारा का गलत उल्लेख, किसी गिरफ्तारी को अवैध ठहराने और आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति  चंद्रशेखर की पीठ ने यह भी यह भी कहा कि इस मामले में इस बात की विस्तार से जांच करेगी कि क्या मेघालय हाईकोर्ट द्वारा केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत देना उचित था। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया कि क्या गिरफ्तारी मेमो में किसी गलत कानूनी धारा का उल्लेख, जो केवल एक टाइपिंग की गलती हो, गिरफ्तारी को अमान्य घोषित करने और जमानत देने का पर्याप्त आधार हो सकता है।

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मेघालय हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध कराने में विफल रही। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या की सजा) की जगह गलती से धारा 403 का उल्लेख किया गया, जो इस संदर्भ में लागू ही नहीं होती। हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव का उदाहरण माना था और इसके बाद उसकी जमानत बरकरार रखी गई।

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