सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं और कान्ह नदी को पुनर्जीवित करने की आस एक बार फिर से जाग रही है। सिंहस्थ 2028 को लेकर करीब 1500 करोड़ खर्च कर कान्ह नदी के जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा रही है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम कमिश्नर के मुताबिक सिंहस्थ के पहले कान्ह नदी को पुराने स्वरूप में लाने की योजना है। इस बार कई चरणों में योजना तैयारी की जाएगी और सभी का नियमित मूल्यांकन होगा। इंदौर को जल्द से जल्द कान्ह नदी नए स्वरूप में दिखेगी।
अलग अलग मदों से लेंगे बजट
अमृत दो में 568 और सिंहस्थ के लिए 525 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट तैयार किया गया है। केंद्र शासन ने नमामि गंगे मिशन के तहत शहर में तीन नए एसटीपी के लिए 511 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा अन्य मदों से भी बजट जारी होगा। कुल 1500 करोड़ रुपए खर्च कर कान्ह नदी के जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा रही है।
यह होगा नए प्रोजेक्ट में
नए प्रोजेक्ट के तहत 12 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 2 इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) बनाए जाएंगे। इसके साथ 338 किमी हिस्से में सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी। नगर निगम ने कुछ समय पहले करीब 29 गांव को निगम सीमा में शामिल किया है। यहां के 338 किमी के हिस्से में सीवरेज लाइन बिछाकर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि नदी में वेस्ट न मिले। कान्ह नदी को पुनर्जीवित करने के लिए निगम ने 9 एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए हैं। इनमें से छह नदी और तीन डाउन स्ट्रीम में बनाए गए थे। इनका उद्देश्य था नदियों में ट्रीटेड वाटर मिल सके लेकिन इससे नदी में सुधार नहीं हुआ। इसलिए अब इस योजना को और भी विस्तार दिया जा रहा है।
सिंहस्थ से पहले चुनौती
सिंहस्थ 2028 से पहले कान्ह का स्वच्छ करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगा। कान्ह नदी के अशुद्ध होने का खामियाजा उज्जैन के लोगों को भी भुगतना पड़ता है। कान्ह नदी इंदौर से होकर त्रिवेणी तट पर शिप्रा में समाहित हो जाती है। यही वजह है कि कान्ह नदी में बहने वाली गंदगी शिप्रा को भी दूषित कर देती है। अगर समय रहते नहीं जागे तो इस बार भी सिंहस्थ में परेशान होना पड़ेगा।
नदी को पुनर्जीवित करने के लिए करने होंगे यह काम
- नदी के पूरे मार्ग पर मिलने वाले नालों की मैपिंग होगी। जो नाले अभी भी नदी में मिल रहे हैं उन्हें वहीं पर ट्रीट करना पड़ेगा।
- नदी के आसपास अतिक्रमण हटाया जाएगा, इसके लिए आसपास के कई क्षेत्रों में लोगों को अतिक्रमण हटाने का भी कहा है।
- नदी के मार्ग में कई जगह पर स्टॉप डैम बनेंगे जिससे पानी को और भी साफ किया जा सके।
- आसपास के क्षेत्रों में वाटर रिचार्जिंग पाइंट बनाएंगे ताकि नदी में बारिश का पानी अच्छे से जा सके।
- नदी के आसपास छोटे बड़े पेड़ों को वैज्ञानिक पद्धति से लगाएंगे ताकि नदी में प्राकृतिक संतुलन बना रहे।