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Indore News: महू उप जेल में खुला भ्रष्टाचार का राज, जेलर का कैदियों संग बर्बरता का वीडियो वायरल, बड़ा एक्शन

Sat, 15 Feb 2025 04:47 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर

सार

Indore News: महू उप जेल में कैदियों के साथ मारपीट और अवैध वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में उप जेलर द्वारा कैदी पर बर्बरता का खुलासा हुआ, जिसके बाद अधिकारी सख्त कार्रवाई में जुट गए हैं।
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Indore News - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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महू उप जेल में फैली अराजकता और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाले मामले ने अब जांच का रूप ले लिया है। कैदी राजेंद्र चौहान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद जेल प्रशासन में हलचल मच गई है। इस मामले में उप जेलर मनोज चौरसिया को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जेल के अंदर यह वीडियो कैसे बना, किसने रिकॉर्ड किया, और मोबाइल जेल के अंदर कैसे पहुंचा? पूरे मामले की गहन जांच एसडीएम को सौंपी गई है।

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महू उप जेल में सात साल तक सजा काट चुके एक पूर्व कैदी से भी पूछताछ की जाएगी, जिसने अपनी आपबीती सुनाकर इस भ्रष्टाचार का खुलासा किया। एडीएम रोशन राय को दिए गए शिकायती आवेदन में कैदी राजेंद्र चौहान ने न केवल लिखित शिकायत दी, बल्कि एक चौंकाने वाला वीडियो भी दिखाया, जिसमें उप जेलर मनोज चौरसिया को कैदियों के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखा कि जेलर ने एक कैदी की गर्दन अपने पैरों के बीच फंसा ली और उसे क्रूरता से पीटा।

मनोज चौरसिया को किया निलंबित
30 जनवरी को इस खबर के मीडिया में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और क्षेत्र के एसडीएम को जांच सौंप दी गई। अब आगे की जांच एसडीएम राकेश परमार करेंगे। अपर कलेक्टर रोशन राय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम महू को जांच के निर्देश दिए, साथ ही जेल अधीक्षक अलका सोनकर को भी इसकी जानकारी दी। जांच के बाद जेल अधीक्षक ने उप जेलर मनोज चौरसिया को निलंबित कर दिया है।
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वीडियो में जेल प्रहरी दया किशन कुशवाहा और सिपाही महेंद्र कुशवाहा भी नजर आ रहे थे, जिससे संदेह गहरा गया है कि जेल में अवैध गतिविधियों को संरक्षण दिया जा रहा था। शिकायतकर्ता चौहान ने आरोप लगाया कि उप जेलर ने उससे मोटी रकम मांगी थी और भुगतान न करने पर उसके साथ बर्बरता की गई। पहले भी चौरसिया पर अवैध वसूली और कैदियों को विशेष सुविधाएं देने के आरोप लग चुके हैं, लेकिन इस बार वीडियो सबूत ने जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा और यह वीडियो किसने बनाया। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या जेल के अंदर कैदियों को अवैध रूप से नशे का सामान और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं? क्या जेल में पैसे के दम पर कैदी खुलेआम घूम सकते थे और वीआईपी ट्रीटमेंट पा रहे थे? इन सभी पहलुओं की जांच एसडीएम के नेतृत्व में की जाएगी और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

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