क्राइम ब्रांच ने हाल ही में साइबर ठगों और गेमिंग एप के लिए खातों को किराए पर उपलब्ध कराने वाले शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक और युवक को गिरफ्तार किया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, 10 जनवरी को डॉ. मोहन सोनी ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। उन्हें शेयर ट्रेडिंग एप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए 3.4 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया था। इस ठगी के पैसे फर्जी खातों में जमा कराए गए थे। इस मामले में शुभम नामदेव उर्फ शुभम संसारिया का नाम सामने आया था। हालांकि, दबिश में शुभम नहीं मिला, लेकिन उसका साला अमन हाथ लग गया। बाद में कुलदीप पगारे को भी गिरफ्तार किया गया।
किराए पर खातों की सप्लाई करने का खुलासा
अमन ने पूछताछ में बताया कि वे साइबर ठगों और दुबई में गेमिंग एप चलाने वालों को फर्जी खातों की सप्लाई करते थे। ट्रांजेक्शन के आधार पर जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने कई लोगों से किराए पर खातों को लेकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इसके बाद इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, अमन ने स्वीकार किया कि वह और शुभम नामदेव डिजिटल अरेस्ट गिरोह के संपर्क में थे। उन्होंने फर्जी कंपनियां रजिस्टर्ड कर बड़ी संख्या में बैंकों में करंट खाते खुलवाए थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा किया जाता था। बदले में उन्हें ठगी की राशि का एक निश्चित प्रतिशत मिलता था।
शुभम नामदेव पर पहले भी दर्ज हैं मामले
शुभम नामदेव पर नानाखेड़ा, उज्जैन में एक और धोखाधड़ी का केस दर्ज है। उसकी संलिप्तता उज्जैन में रामकृष्ण मिशन आश्रम में हुई एक बड़ी साइबर ठगी में भी सामने आई थी। इसके अलावा, उसका साथी विशाल पाटोदी भी फर्जीवाड़े में लिप्त था। इस गिरोह का जाल बहुत ही व्यापक था और यह साइबर ठगी के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल था। इस गिरफ्तारी से यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी साइबर अपराधियों के लिए बैंक की किट और सिम कार्ड्स भेजते थे।
साइबर ठगी के मामले में ठेकेदार से 12.40 लाख की धोखाधड़ी
साइबर ठगों ने एक ठेकेदार से शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 12.40 लाख रुपये की ठगी की। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया के अनुसार, ठेकेदार ललित तिवारी को शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया। पहले छोटे निवेश पर फायदा दिखाया गया, लेकिन बाद में उन्होंने बड़े निवेश करने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद ललित तिवारी ने 12.40 लाख रुपये का निवेश किया, लेकिन जब उन्होंने ट्रेडिंग ऐप से पैसे निकालने की कोशिश की, तो ऐप में लॉगिन होना बंद हो गया, जिससे ठगी का खुलासा हुआ।