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Indore News: इंजीनियरिंग छात्र अब पढ़ेंगे संस्कृत, एसजीएसआईटीएस का बड़ा फैसला

Mon, 26 Jan 2026 07:58 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: इंदौर के प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस में नई शिक्षा नीति के तहत एक नई पहल की जा रही है। संस्थान में पहले से चल रहे फ्रेंच और जर्मन भाषा के पाठ्यक्रमों के साथ अब संस्कृत और प्राकृत भाषा के सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।
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एजुकेशन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इंदौर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान एसजीएसआईटीएस में नई शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। संस्थान अपने भाषाई विंग के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक और पारंपरिक दोनों तरह की भाषाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में यहां फ्रेंच, जर्मन और हिंदी भाषा में सर्टिफिकेट कोर्स सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए संस्थान अब भारतीय जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए संस्कृत और प्राकृत भाषा में भी पाठ्यक्रम शुरू करने की विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।
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भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रमोट करने का उद्देश्य
संस्थान की लैंग्वेज विंग द्वारा हाल ही में संस्कृत भाषा के ओरिएंटेशन और विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी साझा की गई कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य न्यू एजुकेशन पॉलिसी के अनुरूप भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रमोट करना है। आगामी सत्रों से विद्यार्थियों के लिए संस्कृत और प्राकृत जैसी प्राचीन भाषाओं के विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे वे आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ-साथ भारत की समृद्ध भाषाई विरासत से भी जुड़ सकेंगे।

संस्कृत की व्यावहारिक उपयोगिता विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में भी बढ़ रही 
लैंग्वेज विंग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान का मुख्य केंद्र आधुनिक और प्रौद्योगिकी प्रधान विश्व में संस्कृत की प्रासंगिकता को समझना था। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सरिता जैन ने अपने संबोधन में बताया कि वर्तमान समय में संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि इसकी व्यावहारिक उपयोगिता विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए इस भाषा के महत्व को रेखांकित किया।
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शिक्षा जगत में भारतीय मूल्यों और आधुनिक कौशल का समावेश 
इस महत्वपूर्ण अवसर पर डॉ. नीरज जैन और लैंग्वेज विंग की संयोजक डॉ. सारिका तिवारी सहित संस्थान के कई वरिष्ठ संकाय सदस्य और विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का कुशल समन्वय विभाग की फैकल्टी सदस्य डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव द्वारा किया गया। संस्थान के इस कदम को शिक्षा जगत में भारतीय मूल्यों और आधुनिक कौशल के समावेश के रूप में देखा जा रहा है।
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