पीड़ितों के परिजन से मिले राहुल
- फोटो : डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर आए। उनका यह दौरा मुख्य रूप से शहर के दूषित जल से प्रभावित क्षेत्रों और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने पर केंद्रित रहा। सुबह 11 बजे राहुल गांधी इंदौर एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पर उन्हें रिसीव करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सज्जन सिंह वर्मा, सत्यनारायण पटेल समेत कई बड़े नेता पहुंचे। राहुल ने एयरपोर्ट पर ज्यादा समय न बिताते हुए सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल के लिए रुख किया। यहां पर अभी 8 मरीज भर्ती हैं जिनमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
रहवासियों से भी बात की
बॉम्बे हॉस्पिटल में मरीजों का हाल जानने और उनके परिजनों से संवाद करने के पश्चात राहुल गांधी सुबह 11.45 बजे भागीरथपुरा क्षेत्र में पहुंचे। यहां उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से विस्तृत चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने भागीरथपुरा के स्थानीय रहवासियों से भी बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना।
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एक करोड़ के मुआवजे की मांग की गई
जीतू पटवारी द्वारा गठित जांच कमेटी, जिसमें सज्जन सिंह वर्मा और महेश परमार जैसे नेता शामिल हैं, उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपी। इस रिपोर्ट में इंदौर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उनकी लापरवाही से दूषित जल की सप्लाई हुई। कांग्रेस ने इस मामले में हुए मृतकों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से गंदा पानी पीने को मजबूर थे, जिसके कारण 24 लोगों की जान जा चुकी है।
31 जनवरी तक कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन चलेगा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 17 से 31 जनवरी तक व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। यह विरोध प्रदर्शन मनरेगा में बदलाव, कानूनी अधिकारों की बहाली और इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। जीतू पटवारी द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इंदौर नगर निगम को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस ने इस मामले में जान गंवाने वाले 24 मृतकों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। कार्यक्रम के अनुसार, शहरी और ग्रामीण कांग्रेस कमेटियों के नेता जिला स्तर पर एक दिवसीय उपवास रखेंगे। आंदोलन का दूसरा चरण 18 जनवरी से शुरू होगा, जिसमें दूषित जल स्रोतों की जांच और सीवेज लाइनों के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।