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Indore News: नीट यूजी में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 47 छात्र, हाईकोर्ट से दोबारा परीक्षा की मांग खारिज

Wed, 16 Jul 2025 10:19 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: छात्रों ने एनटीए पर पर्याप्त व्यवस्था न करने का आरोप लगाया है, वहीं कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुनः परीक्षा को अनुचित बताया। अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई अगले सप्ताह होनी तय हुई है।
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इंदौर हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीट यूजी 2025 परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए 47 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बुधवार सुबह करीब 4 बजे ऑनलाइन याचिका दाखिल की गई, जिसमें इंदौर के प्रभावित छात्रों ने दोबारा परीक्षा की मांग की है। मामले में छात्रों की ओर से अधिवक्ता मृदुल भटनागर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई की मांग की, लेकिन रजिस्ट्रार ने इसे अगले सप्ताह की सुनवाई में सूचीबद्ध कर दिया है। भटनागर ने बताया कि कुल 75 में से 47 छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। बाकी छात्रों के कोर्ट नहीं जाने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियमित सुनवाई होती है तो याचिकाकर्ता छात्रों के लिए अलग से काउंसलिंग की मांग की जाएगी।
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हाईकोर्ट ने याचिकाएं की थीं खारिज
एक दिन पहले ही इंदौर हाईकोर्ट ने नीट यूजी परीक्षा में गड़बड़ी से प्रभावित 75 से अधिक छात्रों की दोबारा परीक्षा की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से दायर रिट अपील को स्वीकार कर लिया गया। फैसले के दिन ही सभी याचिकाकर्ताओं को ईमेल के जरिए परिणाम भेज दिए गए थे।

कोर्ट ने कहा- विशेषज्ञों की समिति ने की थी जांच
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एनटीए ने छात्रों के विरोध को विरोधी भावना से नहीं लिया, बल्कि एक विशेषज्ञ समिति गठित कर निष्पक्ष जांच करवाई। समिति की सिफारिश के अनुसार, दोबारा परीक्षा की मांग उचित नहीं मानी गई। कोर्ट ने माना कि मामले में पुनः परीक्षा कराना जरूरी नहीं है और एनटीए की अपील स्वीकार की जाती है।
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NTA ने दी सफाई, छात्रों ने उठाए सवाल
भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एनटीए का पक्ष रखते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान देशभर के 22 लाख छात्रों के लिए उचित व्यवस्थाएं की गई थीं। जिन केंद्रों पर बिजली जाने की शिकायत है, वहां पावर बैकअप उपलब्ध था। वहीं, छात्रों की ओर से अधिवक्ता भटनागर ने एनटीए की रिपोर्ट को भ्रामक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए ने छात्रों से 350 करोड़ रुपये की फीस वसूली, फिर भी परीक्षा केंद्रों पर बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी केंद्र का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया गया। लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था और अंततः एनटीए के पक्ष में निर्णय सुनाया।
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