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Indore News: कॉन्फ्रेंस में बोले न्यायविद- "कैदियों के पुनर्वास को बनाना होगा प्रभावी, इससे कम होंगे अपराध

Sun, 09 Aug 2026 07:53 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Indore News: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के तत्वावधान में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन बाल-अनुकूल न्याय प्रणाली और बंदियों एवं उनके परिवारों के पुनर्वास पर विस्तृत चर्चा की गई। 
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कॉन्फ्रेंस में न्यायविदों को सम्मानित किया गया। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के तत्वावधान में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन विशेष रूप से बाल-अनुकूल न्याय, संरक्षण एवं पुनर्वास को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। कॉन्फ्रेंस में न्यायविदों ने कहा कि "कैदियों के पुनर्वास को प्रभावी बनाना होगा तभी समाज से अपराध कम होंगे। हमें उनके जीवन को बेहतर बनाने की व्यवस्थाएं बनाने पर तेजी से काम करना होगा। 
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कॉन्फ्रेंस में विचार-विमर्श में ऐसे बाल-केंद्रित न्याय तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया गया, जो प्रत्येक बच्चे के संरक्षण, सहभागिता, विधिक सहायता, पुनर्वास एवं गरिमा को सुनिश्चित करे। बच्चों को विधिक सहायता प्रदान करने तथा उनके संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित सेवाओं के समन्वय के लिए एकीकृत तंत्र सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। POCSO मामलों में पीड़ित-केंद्रित एवं बाल-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। सत्र का समापन इस विचार के साथ हुआ कि प्रत्येक बच्चे को समयबद्ध संरक्षण, उपयुक्त विधिक सहायता एवं सार्थक न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए समन्वित एवं संवेदनशील विधिक सेवा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है।

बंदियों और उनके परिवारों के लिए भी विशेष योजनाएं
दूसरे दिन के द्वितीय तकनीकी सत्र में बंदियों एवं उनके परिवारों के पुनर्वास, पुनर्समावेशन तथा न्याय तक सार्थक पहुंच पर भी विचार-विमर्श किया गया। बंदियों तथा बंदियों के परिवारों के लिए सहायता को सुदृढ़ करने तथा पैरा-लीगल वालंटियर्स एवं जेल लोक अदालतों की भूमिका को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इनके माध्यम से विधिक सहायता, परिवार से पुनः संपर्क स्थापित करने तथा पुनर्वास संबंधी प्रयासों को प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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समाज की जरूरतों पर आधारित संकल्पों के साथ हुआ समापन
कॉन्फ्रेंस का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि विधिक सेवा आंदोलन को समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित किया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि गरीबी, दिव्यांगता, सामाजिक असुरक्षा, भौगोलिक दूरी, जागरूकता के अभाव अथवा न्याय तक पहुंच में किसी अन्य बाधा के कारण कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय “न्याय तक पहुंच को सुदृढ़ करना” तथा उप-विषय “एकजुट आवाजें, सशक्त कल: संवाद एवं गरिमा के माध्यम से न्याय तक पहुंच को आगे बढ़ाना” था।  कॉन्फ्रेंस से उभरने वाला व्यापक संदेश स्पष्ट रहा कि न्याय सुलभ, समावेशी, गरिमापूर्ण एवं जन-केंद्रित होना चाहिए तथा समान न्याय का संवैधानिक वचन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका, शासन, विधिक सेवा संस्थाओं, न्यायिक अधिकारियों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के उच्च पदस्थ प्रतिनिधियों ने सहभागिता की तथा न्याय को अधिक सुलभ, समावेशी एवं समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए समकालीन चुनौतियों एवं नवीन दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श किया। 
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