एमवाय अस्पताल में कैदी ने की आत्हत्या।
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महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में चूहों द्वारा बच्चों को कुतरने की घटना के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। भविष्य में ऐसी किसी भी गंभीर स्थिति से बचने के लिए अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शिफ्ट करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
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हाई कोर्ट की सख्ती और विशेषज्ञों की सलाह
पिछले दिनों एमवाय अस्पताल में चूहों की गंभीर समस्या पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट के निर्देश पर विशेषज्ञों की एक टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, विशेषकर NICU और PICU का। चूंकि ये दोनों यूनिट सीधे तौर पर नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज से जुड़े हैं, टीम ने इनकी मौजूदा स्थिति को असुरक्षित माना। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इन अति संवेदनशील यूनिटों को किसी ऐसे सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहाँ चूहों या अन्य किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा न हो।
शासन की रिपोर्ट और नए ठिकाने का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने भी अपनी एक रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की, जिसमें अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसी के बाद, एमवाय अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों और अधिकारियों की एक टीम ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम ने विभिन्न फ्लोर्स का निरीक्षण किया और यह तय करने की कोशिश की कि इन यूनिटों को किस वार्ड या हॉल में सबसे सुरक्षित तरीके से स्थापित किया जा सकता है।
स्टाफ भी होगा साथ में शिफ्ट
सूत्रों के अनुसार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इन यूनिटों को शिफ्ट करने में कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं है। हालांकि, वहां पर इन विशिष्ट यूनिटों के संचालन के लिए स्टाफ की कमी है। इसे देखते हुए यह योजना बनाई जा रही है कि एमवाय अस्पताल के NICU और PICU में कार्यरत पूरे स्टाफ को भी नई जगह पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा, ताकि बच्चों के इलाज में कोई बाधा न आए। इस पूरी प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।