मंडी के बाहर प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
इंदौर के चोइथराम मंडी में किसानों ने लहसुन की कीमतों में भारी गिरावट और चीन के लहसुन के आयात के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नाराज किसानों ने मंडी के गेट बंद कर प्रदर्शन किया और व्यापारियों एवं मंडी अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि अचानक लहसुन की कीमतें 5 से 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने चीन के लहसुन पर प्रतिबंध लगाने और निजी मंडियों को दोबारा शुरू करने की मांग की।
निजी मंडियों को शुरू करने की मांग
किसानों का तर्क है कि निजी और सरकारी मंडियों के बीच प्रतिस्पर्धा से उन्हें उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा, जबकि वर्तमान स्थिति में व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी किसानों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याओं को समझा।
चीन से लहसुन बुलाकर भारत के किसानों का नुकसान कर रही सरकार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि चीन पर सरकार की दोहरी नीतियां हैं। चीन से सस्ता लहसुन बुलवाकर सरकार ने भारत के किसानों को धोखा दिया। किसान लगातार नुकसान उठा रहा है और जब उसकी उपज कौड़ियों के दाम पर बिकती है तब कोई उसकी नहीं सुनता जब उसे थोड़ा भी फायदा होता है तो सरकार तुरंत उसे घाटा करवा देती है।
एक ही दिन में 7 हजार रुपए गिरा लहसुन का भाव
किसानों ने बताया कि अन्य मंडियों में लहसुन के भाव 500 से 700 रुपए तक कम होते हैं, लेकिन इंदौर मंडी में एक ही दिन में 5 से 7 हजार रुपए तक की गिरावट आ जाती है। इससे किसान मजबूर होकर अपना माल वापस ले जाने पर विवश हो जाते हैं। कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। मंडी प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुख्य मांग निजी मंडियों को पुनः चालू करने की थी। किसानों का मानना है कि ऐसा करने से उन्हें व्यापारियों और अधिकारियों की मनमानी से बचने और अपने उत्पाद का सही मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।