प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने चुटीले अंदाज से सबको गुदगुदाया। महाराष्ट्र के घटनाक्रम के बारे में तंज कसते हुए कहा कि देवेंद्र भाई (फडणवीस) का दो तीन दिन से टीवी पर भाषण चल रहा था। मैं समंदर हूं लौट कर आऊंगा... उन्हें घर तो मिल गया, लेकिन कमरा छोटा मिला। एकनाथ को बड़ा कमरा मिल गया। इस कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन भी मौजूद थीं।
कुमार विश्वास इंदौर में कौटिल्य एकेडमी के कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि इंदौर से मेरा नाता किसी सेलिब्रिटी होने से ज्यादा इंदौरी होने का है, क्योंकि लोगों को लगता है कि उनकी बातचीत में जितना इंदौरीपन है, उतना ही मेरे अंदर भी है, इसलिए इंदौर को व लोगों को लगता है कि मैं उनका ही आदमी हूं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जितने भी बच्चे तैयारी कर रहे हैं, उनको बोल रहा हूं, भगवान ने आपको जिस काम के लिए भेजा गया है, वह काम करें। क्योंकि इस देश के आज सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी हैं। अभी मुकेश अंबानी पीछे चले गए हैं, खैर कुछ दिन में आगे आ जाएंगे, दिल्ली पति की जिस पर कृपा हो जाएगी, वह आगे पीछे आता-जाता रहेगा। आगे कहा कि मैं जिंदगीभर मेहनत करुं, जिंदगी भर सत्ता की दलाली करुं, मैं जिंदगी भर मेरी लोकप्रियता का दुरुपयोग करुं, लेकिन तब भी गौतम अडानी जितना पैसा कमाते हैं, उसका एक प्रतिशत भी नहीं कमा सकता। अडानी 1 हजार नोबल पुरस्कार विजेता को ट्यूशन लगवा लें, लेकिन ईश्वर ने सरस्वती ने जो कृपा मुझ पर की है, उसे वह नहीं कर सकते।
कुमार विश्वास ने पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा कि मैंने कोरोना काल में फॉर्म हाउस पर 2 से 3 बच्चों को पढ़ाया। तब मैंने देखा कि जो कविता और कहानियां अभी पढ़ाई जा रही हैं, वह खराब नागरिक तैयार करने वाली कहानियां हैं। 3री क्लास में कविता है, 10 साल की छोकरी, लिए आम की चोकरी, बताती नहीं दाम है, देती नहीं आम है। 3री क्लास के 8 साल के बच्चों को आप बता रहे हो कि जो मेहनत करके, एक बच्ची अपना घर चला रही है, उसको आप छोकरी बोलो उसको सड़क पर छेड़ो, आम नहीं देती है, ज्यादा दाम बताती है। नेटफ्लिक्स देखिए, अमेजन देखिए, एक लाइन लिखी आती है 18 प्लस का कंटेंट है। यह सुनने वाले उसे देखने के लिए फिर और उत्सुक हो जाते हैं। आगे कहा कि 30 से 40 साल पहले भी लोग आईपीएस बनते थे, लेकिन उस समय सरकारी स्कूल इतने अच्छे होते थे। पहले भी कहा है आज फिर कह रहा हूं, देश में कोचिंग सेंटर हों, यह मेरे लिए खुशखबरी नहीं है, लेकिन मूलत: मैं इस प्रथा के खिलाफ हूं, क्योंकि किसी लोकतंत्र के राज्य शासन में शिक्षा देने का काम किसी दूसरे को करना पढ़ रहा है, लेकिन यह खुशी की बात है कि शासन फेल हुई तो प्राइवेट एकेडमी ने यह जिम्मा निभाया।
मैं सिविल सर्विस का इंटरव्यू देने गया, वहां इंटरव्यू लेने वाले लोग मुझे जानते थे। उन लोगों ने तय कर रखा था मुझे सिलेक्ट नहीं करना है, लेकिन मैंने तय किया था कि मुझे सिलेक्शन लेकर ही बाहर आना है। 20 मिनट का इंटरव्यू होता है, लेकिन मेरा 58 मिनट का इंटरव्यू हुआ। वहां चेयरमैन अच्छे व्यक्ति थे, बोले कि अच्छा लड़का है, मुझे तो इसको लेना है। इंटरव्यू से बाहर निकलकर पीसीओ से मैंने पिताजी को फोन किया तो वह बोले हां भाई महाकवि हो गया इंटरव्यू। जिसके बाद मैंने एक वाक्य कहा 42 पोस्ट है, 41 बेईमानी से हो जाएं, अगर 1 भी ईमानदारी से होगी तो मेरा हो जाएगा। यह मेरा आत्मविश्वास था। बच्चों 33 साल में पहली बार बोल रहा हूं, कभी कोई समस्या हो मेरे फेसबुक पर मैसेज करना। मेरी टीम से बात कर आपसे संवाद करूंगा। आपको समझाऊंगा, क्योंकि कोई ऑप्शन नहीं है, हमारे पास फैल हो जाने का, आगे नहीं पढ़ने का। आप गांव से यहां पहुंचाए ही इसलिए गए हो, क्योंकि परिवार के लिए, गांव के लिए, समाज के लिए आईएसए या आईपीएस बनो और अच्छा काम करो।