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Indore News: अब महिलाएं सिखा रहीं प्राकृतिक खेती और किचन गार्डन के आधुनिक तरीके, महू से शुरू हुई अनूठी पहल

Tue, 21 Apr 2026 06:56 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Indore News: इंदौर जिले में कृषि सखियों की पाठशाला के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं सशक्त बन रही हैं। जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है और महिलाएं सक्रिय भागीदारी निभाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
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इंदौर में शुरू हुई कृषि पाठशाला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर जिले में कृषि के क्षेत्र में एक अनूठा बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां पारंपरिक स्कूल की तर्ज पर ‘कृषि सखियों की पाठशाला’ शुरू की गई है। महू जनपद से शुरू हुई इस पहल में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ही शिक्षक की भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएं अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती, किचन गार्डन और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित कर रही हैं।

किचन गार्डन और जैविक खेती का प्रशिक्षण
संध्या सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष पवित्रा निनामा ने इस अभियान के तहत पांच गांवों के 100 से अधिक परिवारों को किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। इस पहल के माध्यम से किसानों को जीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक घोल बनाने की विधि सिखाई जा रही है। इसके अलावा, 125 से अधिक खेतों की मिट्टी की जांच भी कराई गई है, ताकि किसान अपनी जमीन की उर्वरता के अनुसार फसल का चयन कर सकें। कोलानी गांव की प्रमिला वसुनिया सहित कई महिलाओं ने अब अपने घर पर ही सब्जियां उगाना शुरू कर दिया है।

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महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण
यह कृषि पाठशाला केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का जरिया भी बन रही है। जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ के अनुसार, जिले में 34 प्रोड्यूसर कंपनियां सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से महिलाएं गेहूं, मूंग और आलू के उपार्जन व विपणन का कार्य संभाल रही हैं। देपालपुर और महू ब्लॉक में महिलाएं स्वयं अनाज की खरीदी कर उसे मंडी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

100 से अधिक कृषि पाठशालाएं स्थापित
जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने बताया कि यह नवाचार बेहद सफल रहा है और अब तक 50 से अधिक गांवों में 100 से ज्यादा कृषि पाठशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इंदौर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने भी इस मॉडल की सराहना की है। उनके अनुसार, कृषि सखियों के माध्यम से किसानों को बिना किसी शुल्क के व्यवहारिक जानकारी मिल रही है, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और पैदावार बढ़ने की उम्मीद है।

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