कबीर की वाणी जन जन तक पहुंचाने वाले महू के मालवी लोकगायक भेरूसिंह चौहान को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा है। इस मौके पर अमर उजाला ने उनसे विशेष बातचीत की।
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1. पद्मश्री मिलने के बाद कैसा लग रहा है आपको
पद्मश्री मिलने के बाद लगा की इतने सालों की मेहनत सफल हो गई। कबीर जी मेरे इष्ट हैं। मेरा मानना है कि उन्हें ही यह सम्मान मिला है। पूरे देश के कोने कोने से फोन आ रहे हैं और लोग बधाई दे रहे हैं। मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा और उन सभी को जिन्होंने इस सफर में मेरी किसी भी रूप में मदद की है। मुझे संगीत विरासत में मिला और पिताजी ने मुझे यह सब सिखाया। इस सम्मान ने हमारे पूरे परिवार की मेहनत सफल कर दी।
2. नए दौर में गीत संगीत किस तरह से बदल रहा है
नए दौर में गीत संगीत बहुत बदल गया है। अब गीत संगीत में आनंद नहीं रहा। यह एक साधना है। यह ईश्वर के पास पहुंचने का उनकी अनुभूति करने का माध्यम है। संगीत में डूबकर हम ईश्वर का संदेश ही जन जन तक पहुंचाते हैं। आज हमारे कार्यक्रमों में लोग दुर्व्यसन करते हैं, यह बहुत बुरा लगता है। जो कबीर को आत्मसाद करके सुनते हैं उनका जीवन बदलता है। लोग इस बात का महत्व नहीं समझते। सोशल मीडिया की दुनिया में गीत संगीत का मतलब वह नहीं रहा जो पहले हुआ करता था।
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3. जो युवा इस क्षेत्र में आ रहे हैं, उन्हें क्या संदेश देंगे
संगीत को निर्गुण भाव से सीखो। प्राथमिकता में आप संगीत को आत्मसाद करने का गुण रखें। यह आपके पूरे जीवन को बदल देगा। यह सिर्फ पैसा कमाने या शोहरत के लिए नहीं है। यदि किसी चाहत से यह किया तो आप सफल नहीं होंगे। इसे बिना किसी चाहत के सीखते रहिए। यह एक तपस्या है। ईश्वर की साधना है।
4. बाबा साहब भी महू में जन्मे उनके लिए क्या कहेंगे
मैं महू में रहता हूं। महू बाबा साहब अंबेडकर की जन्मस्थली भी है। बाबा साहब ने संविधान बनाकर हर तबके को एक समान अधिकार दिए। उन्होंने समाज को जागृत किया और आज सरकार उनके संदेशों पर ही चल रही है। भेरूसिंह ने कहा कि अंबेडकर और कबीर में बहुत सारी समानता है। कबीर ने जातिवाद, संप्रदाय सबसे ऊपर उठकर ईश्वर का संदेश जन जन तक पहुंचाया। कबीर ने समाज में से भेदभाव और आडंबर को खत्म किया।