इंदौर शहर की सड़कों पर रविवार को कृष्णभक्ति का ज्वार नजर आया। इस्कॉन मंदिर की अगुवाई में ओडिशा के पुरी की तर्ज पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली। 50 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विराजे थे। पूरे यात्रा मार्ग पर हरे राम, हरे कृष्ण तथा जगन्नाथ... चका नयन के भजनों से माहौल भक्तिमय हो गया। रथयात्रा में विदेशी भक्त भी शामिल हुए। हाइड्रोलिक रथ की रस्सियां थामकर भगवान का रथ भक्तों ने खींचा और भक्ति में लीन नजर आए।
अन्नपूर्णा मंदिर से रविवार शाम को रथयात्रा निकली। मथुरा से विशेष पोशाक लाई गई थीं, जो भगवान जगन्नाथ को पहनाई गईं। हाइड्रोलिक तकनीक से बने रथ की ऊंचाई के हिसाब से उसे ऊपर-नीचे किया जा रहा था, ताकि बिजली के तार रथयात्रा में बाधा न बनें। यात्रा का शुभारंभ इंदौर स्थित इस्कॉन मंदिर के स्वामी महामनदास और अन्नपूर्णा आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि की मौजूदगी में हुआ। अतिथियों ने स्वर्ण निर्मित झाड़ुओं से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई की।
50 स्वागत द्वारों से बरसाए फूल
अन्नपूर्णा मंदिर से शुरू हुई यात्रा नरेंद्र तिवारी मार्ग, रणजीत हनुमान मंदिर, महू नाका, छत्रीपुरा, बियाबानी, मालगंज, टोरी कॉर्नर, गोराकुंड, खजूरी बाजार होते हुए राजबाड़ा स्थित गोपाल मंदिर पहुंची। यात्रा मार्ग पर 50 से अधिक स्वागत द्वार लगे थे, जहां पर खड़े भक्तों ने भगवान के रथ पर पुष्पवर्षा की। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आरती उतारकर भगवान का स्वागत किया। यात्रा में राधा-कृष्ण स्वरूपों की झांकियां, भक्ति नृत्य, विंटेज कार और डीजे पर गूंजते भजनों ने माहौल को कृष्णमय बना दिया। रथयात्रा ढाई घंटे में पूरी हुई। इस कारण राजबाड़ा क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था भी परिवर्तित की गई थी।