भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। भौतिकी विभाग की मैटेरियल्स एंड डिवाइस (एमएडी) लैब ने एक ऐसा अनोखा 'कलर-मॉड्यूलेटिंग सुपरकैपेसिटर' बनाया है, जो न केवल ऊर्जा स्टोर करता है, बल्कि रंग बदलकर अपनी चार्जिंग स्थिति भी बताता है और साथ ही इंफ्रारेड हीट को भी रोकता है।
रंगों से बताता है चार्जिंग लेवल
प्रोफेसर राजेश कुमार के नेतृत्व में विकसित यह इलेक्ट्रोक्रोमिक सुपरकैपेसिटर अपना चार्ज लेवल खुद दिखाता है। डिवाइस पूरी तरह चार्ज होने पर लाल, आधा चार्ज होने पर हरा और पूरी तरह डिस्चार्ज होने पर नीला हो जाता है। यह रियल-टाइम कलर फीडबैक मॉनिटरिंग सर्किट की जरूरत को खत्म कर देता है और उपयोगकर्ताओं को तुरंत डिवाइस की ऊर्जा स्थिति का पता चल जाता है। यह रंग परिवर्तन एक विशेष वैनेडियम ऑक्साइड कॉम्प्लेक्स के कारण होता है।
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दोहरी कार्यक्षमता: स्टोरेज और हीट ब्लॉकिंग
इस तकनीक की खासियत इसकी दोहरी कार्यक्षमता है। ऊर्जा भंडारण के साथ-साथ, यह डिवाइस छोटी विद्युत धाराओं का उपयोग करके इंफ्रारेड ऊष्मा को भी सक्रिय रूप से अवरुद्ध करता है। प्रोटोटाइप ने लाल रंग पर 70% और नीले रंग पर 50% तक ऑप्टिकल मॉड्यूलेशन दिखाकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
लचीला और बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव
यह उपकरण ठोस अवस्था (सॉलिड-स्टेट) में है और लचीला भी है, जिसका अर्थ है कि इसे प्रदर्शन पर असर पड़े बिना मोड़ा या घुमाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने 25 cm² के एक बड़े प्रोटोटाइप का उपयोग करके इस तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है, जो साबित करता है कि इसे वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए बढ़ाया (स्केल-अप) जा सकता है।
उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं
इस नवाचार की ऑटोमोटिव, स्मार्ट बिल्डिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों में अपार संभावनाएं हैं। वैश्विक ऑटोमोटिव सुपरकैपेसिटर बाजार, जो 2023 में 1.3 बिलियन डॉलर का था, 2032 तक 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रोफेसर राजेश कुमार के अनुसार, यह तकनीक गैजेट्स और वाहनों के इलेक्ट्रॉनिकीकरण पर काम करने वाले उद्योगों के लिए बेहद उपयोगी होगी।
महिला वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान
इस उपलब्धि में महिला वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। शोध दल में आधे से ज्यादा सदस्य महिलाएं हैं, जिनमें भूमिका साहू, डॉ. तनुश्री घोष, निकिता और डॉ. सुचिता कंडपाल शामिल हैं। उनके साथ प्रमुख शोधकर्ता डॉ. लव बंसल और देब कुमार रथ भी हैं।
गौरव का क्षण
आईआईटी इंदौर के निदेशक, प्रोफेसर सुहास जोशी ने इसे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों में योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।