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Indore News: राजवाड़ा पर हुआ ऐतिहासिक होलिका दहन, 300 साल पुराने बर्तनों से हुई पूजा

Thu, 13 Mar 2025 07:46 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: इंदौर के राजवाड़ा पर आज ऐतिहासिक सरकारी होलिका दहन का आयोजन हुआ। होलिका दहन के लिए 1100 कंडों का उपयोग हुआ और पूजा में देवी अहिल्या बाई होलकर के 300 साल पुराने चांदी के बर्तनों का उपयोग किया गया। 
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राजवाड़ा पर होलिका दहन का कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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शहर की शान ऐतिहासिक राजबाड़े पर गुरुवार शाम 7 बजे सरकारी होलिका दहन हुआ। होलिका दहन के लिए 1100 कंडों का उपयोग हुआ और पूजा में देवी अहिल्या बाई होलकर के 300 साल पुराने चांदी के बर्तनों का उपयोग किया गया। 

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राजबाड़ा पर होलिका दहन में होलकर राजवंश के वंशजों के साथ करीब 40 विशिष्ट मेहमान भी इस महत्वपूर्ण आयोजन में शामिल हुए। इस वर्ष के सरकारी होलिका दहन में पहली बार होलकरों के वंशजों ने राजबाड़ा स्थित भगवान मल्हारी मार्तंड के दर्शन किए और फिर देवी अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके पश्चात होलिका दहन की पूजा विधिवत रूप से प्रारंभ की गई। निर्धारित समय के अनुसार ठीक 7 बजे होलिका दहन संपन्न किया गया। 

दहन के बाद खेला रंग गुलाल
होलिका दहन के बाद सभी लोगों ने उक्त मंदिर में भगवान की आराधना की और रंग-गुलाल खेले। इसके अतिरिक्त देवी अहिल्या बाई होलकर की गादी पर चांदी की पिचकारी के माध्यम से रंग डाला गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आगंतुक उपस्थित रहे।
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1100 कंडों से किया जाएगा होलिका दहन
मल्हारी मार्तंड मंदिर के पुजारी पंडित लीलाधर वारकर ने बताया कि इंदौर में सरकारी होलिका का दहन 1100 कंडों से किया गया। इंदौर में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें हर साल होलिका दहन के लिए कंडों का उपयोग किया जाता है। इस वर्ष भी निर्धारित समय पर ही होलिका दहन की प्रक्रिया पूरी हुई।

अहिल्या बाई होलकर के चांदी के बर्तनों से पूजा
पंडित वारकर ने बताया कि होलिका दहन की पूजा में देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा प्रयुक्त चांदी के बर्तनों का उपयोग किया गया। इन चांदी के बर्तनों में थाली, कटोरी, चम्मच, जलपात्र तथा चांदी की विशेष रूप से नक्काशीदार पिचकारी शामिल हैं। ये बर्तन लगभग तीन सौ वर्ष पुराने हैं और इन पर अद्भुत नक्काशी की गई है। बुधवार को इन बर्तनों को विशेष रूप से साफ किया गया था। 

दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग, महिलाएं करती हैं पूजा
सरकारी होलिका दहन को देखने के लिए न केवल इंदौर बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग विशेष रूप से आए। होलिका दहन के पश्चात इंदौर में विभिन्न स्थानों पर भी होलिका दहन का आयोजन किया गया। सरकारी होलिका दहन के उपरांत महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होलिका की पूजा की और उसकी परिक्रमा कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
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